पे बेक टू सोसाइटी ही वास्तविक अंबेडकर वाद और बुद्ध धर्म की पालना है
यानी दया , करुणा, सहयोग ,और सहृदयता , और समानता हेतु कानूनी संवैधानिक संघर्ष
जयपुर । कुछ लोगों ने हिंदू धर्म की आलोचना को अंबेडकर वाद मान लिया हे जबकि न तो बुद्ध न ही बाबा साहब आलोचना करते हे दोनो ही अपने आंतरिक ज्ञान, प्रकाश को रोशन करने की बात करते हे,,
बाबा साहेब के संविधान की मुख्य लाइन प्रस्तावना में लिखी है धर्म और उपासना की स्वतंत्रता ,और संविधान में दिया मूल अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता ,अनुच्छेद 25 से 28 तक भारतीय नागरिक को उसकी इच्छा अनुसार धर्म ,उपासना ,आस्था ,पूजा पाठ की स्वतंत्रता उपलब्ध कराती हे यानी प्रत्येक व्यक्ति अपनी इच्छा अनुसार धर्म अपना सकता है और आचरण कर सकता है।
बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञा में
एक से लेकर 8 तक की प्रतिज्ञा बौद्ध धर्म अपनाने के बाद की है ( ना की एक धर्म में यानी हिंदू धर्म में रहते हुए रहते हुए उसी की आलोचना करना ) अपनाने के बाद ही सिर्फ बोध धर्म की पालना की बात करते है और स्वय की बात करते है। “की मैं यह नहीं मानता अर्थात् जैसा बुद्ध ने कहा था कि स्वयं करके देखो ना की अंधानुकरण करो और स्वयं सीखो ,यहां बाबा साहब किसी को यह नही कहते की आप भी अपना धर्म छोड़ दो और जैसा में करता हूं वैसा ही करो ,,बल्कि वह संदेश देते है की में ऐसा करूंगा ……. किसी धर्म की आलोचना न ही उनकी प्रतिज्ञा में है ना संविधान में ,,
22 प्रतिज्ञा में
9, से लेकर 18 तक वह समानता स्थापना अष्टांग मार्ग ,दस परमिता , दया प्रेम करुणा ,सहयोग ,सत्य की पालना , करना ,,, और झूठ ,व्यभिचार ,चोरी शराब ,हिंसा ,आलोचना नही करने की बात करते है और प्रेरित करते है की आप सब भी ऐसा करेंगे तो समाज में समानता और न्याय की स्थापना होगी ।
19 में ऊंच नीच को खत्म करने के लिए हिंदू धर्म का त्याग करते हे और बुद्ध का अनुसरण करते है ,लेकिन आम आदमी जो हिंदू धर्म में है के लिए जातीय उत्पीड़न के खिलाफ संविधान में कानून बनाने की ताकत देते हे और आज एससी एसटी एक्ट उन्ही की देन है । संविधान की बदौलत ,समानता की स्थापना के लिए कानूनी संघर्ष का रास्ता भी है।
आम इंसान जो बुद्ध और अंबेडकर नही हो सकता और जिसने अपना धर्म नही बदला वो 9 से लेकर 18 तक की प्रतिज्ञा यानी , सत्य ,प्रेम ,सहयोग , दया , समयक्क विचार ,कार्य ,,अर्थात ज्ञान , शील , करुणा को अपना कर बुद्ध और बाबा साहब के मार्ग पर चल सकता है ,
मेरा अंबेडकर वाद धर्म पर नही बल्कि कर्म पर आधारित है जो बाबा साहब चाहते थे यानी अपने पीछे रह गए कमजोर ,गरीब ,उत्पीड़ित जरूरत मंद की सहायता यानी पे बेक टू सोसाइटी करना ,,
मै समानता की स्थापना हेतु अपने लोगो को कानूनी रूप से मजबूत बनाने का प्रयास कर रही हूं पिछले पांच साल से ताकि जातीय उत्पीड़न का खात्मा कानून की और संविधान की ताकत से हो ,,
अपने गरीब जरूरत मंद लोगों को हर तरह की सहायता ,आर्थिक ,मानसिक ,कानूनी ,शैक्षिक ,मेडिकल आदि जो कर सकती हूं वो करने का प्रयास कर रही हूं और मेरा अंबेडकर वाद हमेशा पे बेक टू सोसाइटी के सिद्धांत पर चलता रहेगा , इसके लिए निशुल्क पाठ शाला चला रही हूं अपने साथी सहयोगियों की मदद से।
अतः आप भी वास्तविक अंबेडकर वादी बनना चाहते है तो धर्म की बजाय कर्म की बात करें , कर्म में करुणा लाएं , कर्म में गरीब की सहायता को स्थान दें , कर्म में समाज को समय ,दें।
जिसके पास जो है वो समाज को दे ज्ञान, कौशल , समय ,सहयोग ,।।।।
आलोचना न किसी का विकास रोक सकती है ना किसी का विकास कर सकती हे।।
लेखिका सीमा हिंगोनिया
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
