
जयपुर। राजधानी जयपुर में भी एससी वर्ग के लोगों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ताजा मामला जयपुर के बजाज नगर थाना इलाके का है जहां वर्ष 1956 में अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को बसाया गया था और उनकी बालिकाओं की शिक्षा के लिए बाबा साहब अंबेडकर के नाम से नवीन अंबेडकर राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय की स्थापना की गई थी। तब से लेकर आज तक उस कन्या विद्यालय में हजारों छात्राओं ने शिक्षा ग्रहण की। लेकिन वसुंधरा राजे सरकार के दौरान समानीकरण के नाम पर इस स्कूल को बंद कर दिया गया। तब भी इसका अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने विरोध किया । कई बार तत्कालीन शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ को ज्ञापन भी दिए। लेकिन सरकार के दौरान सुनवाई नहीं हुई और स्कूल शुरू नहीं हो सका। बजाज नगर बैरवा कॉलोनी में स्थित इस स्कूल के आसपास की अधिकांश आबादी अनुसूचित जाति वर्ग की है। ऐसे में लोगों को लगा कि अब कांग्रेस सरकार आ गई है, तब तो यह स्कूल फिर से शुरू होगा। उन लोगों ने इस उम्मीद में गहलोत सरकार में खूब ज्ञापन दिए। स्कूल को फिर से शुरू कराने के लिए लेकिन स्कूल शुरू नहीं हो सका। लोगों का संघर्ष जारी था। इलाके के अधिकांश आबादी भी कांग्रेस माइंडेड है इसलिए लगता था कि कांग्रेस सरकार में अंबेडकर साहब के नाम से चल रही यह स्कूल फिर से शुरू हो जाएगी लेकिन तू शुरू नहीं हो सका लोगों का संघर्ष जारी है।

गहलोत सरकार ने अंबेडकर स्कूल की बिल्डिंग विप्र कल्याण बोर्ड को आवंटित कर दी
कांग्रेस सरकार से एससी वर्ग को खास उम्मीद रहती है कि कम से कम यहां उनकी मांगे तो स्वीकार कर ली जाएगी। लेकिन यहां हुआ उल्टा गहलोत सरकार ने डॉक्टर अंबेडकर के नाम से संचालित स्कूल की बिल्डिंग को राजस्थान विप्र कल्याण बोर्ड को आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी ।विप्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश शर्मा ने भी आनन-फानन में अंबेडकर स्कूल की बिल्डिंग पर अपना बोर्ड लगवा दिया। जैसे ही लोगों को इस बात की भनक लगी लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराया शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला से मिले मालवीय नगर से कांग्रेस की प्रत्याशी रही और वर्तमान में समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष डॉ अर्चना शर्मा से भी मिले स्थानीय पार्षद करण शर्मा से मिले और विप्र बोर्ड के अध्यक्ष महेश शर्मा से मिलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां यह बिल्डिंग है उसके आसपास 80 फ़ीसदी आबादी एससी वर्ग की है। इस भवन का नाम भी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम है। ऐसे में इस भवन को विप्र बोर्ड को देने की सरकार की मंशा समझ से परे है। बजाज नगर विकास समिति के अध्यक्ष ललित कुमार और सचिव मदन लाल बैरवा का कहना है कि जयपुर विप्र बोर्ड को देने के लिए और भी बहुत सारे भवन खाली पड़े हैं , वो दिए जा सकते हैं । कम से कम इससे दलित वर्ग की भावनाओं को तो आहत नहीं किया जाए। ललित कुमार का कहना है कि एक तरफ तो देश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी ढिंढोरा पीट रही है। दूसरी तरफ दलित गरीब बस्ती में 1956 से डॉक्टर अंबेडकर बालिका विद्यालय को बंद कर, उसकी बिल्डिंग को ही राजस्थान विप्र कल्याण बोर्ड को देना सरासर अन्याय है । यह सब कुछ हो रहा है राजधानी जयपुर में इसका इसका संदेश पूरे देश में जाएगा । सरकार को चाहिए कि वह लोगों की भावनाओं का ख्याल रखें। सालों से यहां सामाजिक सद्भाव के साथ सब रह रहे हैं। अंबेडकर कन्या विद्यालय को फिर से शुरू किया जाए । विप्र बोर्ड को दूसरा भवन आवंटित किया जाए। क्योंकि इस स्कल में सभी जाति धर्म के बच्चे बच्चियां अध्ययन करते हैं। इससे स्थानीय लोगों की भावनाएं भी जुड़ी हुई है । एससी वर्ग के लिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर से बढ़कर कोई भी नहीं है, ऐसे में उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाए। स्कूल को बचाने के लिए आज रक्षाबंधन के दिन कार्यक्रम संयोजक राधा देवी के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने विद्यालय भवन के रक्षा सूत्र बांधकर सरकार से इसे फिर से अंबेडकर कन्या विद्यालय ही रखने की मांग की है। लोगों ने सरकार से विप्र बोर्ड का आवंटन निरस्त करके अंबेडकर स्कूल को फिर से शुरू करने के लिए भवन के मुख्य द्वार पर रक्षा सूत्र बांधने बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाएं भी जा पहुंची। स्थानीय लोगों ने भी सरकार से मांग की है कि यहां वर्षों से सामाजिक सद्भाव को कायम रखें और सरकार इस पर पुनर्विचार करें। जबरन किसी भी तरह का उन्माद पैदा करने की कोशिश नहीं करें, क्योंकि यह सीधा सीधा एससी वर्ग के लोगों के हितों पर कुठाराघात है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
















































