
कांग्रेस नहीं खड़ा करेगी कोई उम्मीदवार
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में होने वाले एक राज्यसभा सीट के लिए पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है आपको बता दे रवनीत सिंह बिट्टू लोकसभा चुनाव में ही कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे भारतीय जनता पार्टी ने नवनीत सिंह बिट्टू को लोकसभा का टिकट भी दिया था लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें हर का सामना करना पड़ा अब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में उन्हें राजस्थान से राज्यसभा में भेजने का निर्णय किया है। नवनीत सिंह बिट्टू वर्तमान में रेल राज्य मंत्री हैं। बिट्टू कल राज्यसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करेंगे । वहीं कांग्रेस पार्टी ने कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं करने का निर्णय लिया है ।इससे रवनीत सिंह बिट्टू का निर्विरोध ही राज्यसभा उम्मीदवार चुना जाना तय है। आपको बता दें कि कल राज्यसभा नामांकन की आखिरी तारीख है इसलिए बिट्टू कल ही नामांकन भरेंगे।
बीजेपी को रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा मेंबर बनने से मिलेगा फायदा
लुधियाना से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी रवनीत सिंह बिट्टू को भारतीय जनता पार्टी ने सरकार में रेल राज्य मंत्री बनाया। हाल ही में उन्हें हरियाणा से भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन बाद में कांग्रेस छोड़कर आई कांग्रेस की दिग्गज नेता किरण चौधरी को वहां से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। माना जा रहा है कि रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा भेजने से भारतीय जनता पार्टी को देशभर में सिख समुदाय का समर्थन मिल सकता है। क्योंकि किसान आंदोलन के बाद से ही सिख समुदाय बीजेपी और खासतौर पर मोदी जी से नाराज चल रहा है । ऐसे में यह सिख समाज को साधने की बड़ी कोशिश है ।स्वर्गीय बेअंत सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री रहे हैं और पंजाब में सिख समुदाय में उनकी अच्छी पेठ रही है । खुद रवनीत सिंह बिट्टू भी कांग्रेस के दो बार सांसद रह चुके हैं । ऐसे में उनका खुद का अपना व्यक्तिगत जलवा है ।केंद्र सरकार ने अब उन्हें राज्यसभा से संसद में भेजने का निर्णय किया है तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में रवनीत कौर की पंजाबी समुदाय की पेठ का फायदा मिल सकता है।
कई स्थानीय नेताओं के ख्वाब टूटे
राजस्थान के कई नेता लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं । विधानसभा चुनाव में जमकर मेहनत की लेकिन चुनाव में सफलता नहीं मिली। उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने मेहनत की और लगातार पार्टी की सेवा में जुड़े हुए, कई नेता ऐसे थे जो राज्यसभा में जाने की कतार में खड़े थे । लेकिन जैसे ही रवनीत सिंह बिट्टू के नाम की घोषणा हुई ,उसके बाद इन नेताओं के सपनों पर पानी फिर गया। नेताओं का इसमें कोई दोष भी नहीं है क्योंकि नेता वाकई में इनमें से करीब आधा दर्जन नेता बहुत ही ईमानदारी के साथ पार्टी की सेवा कर रहे हैं और संगठन को मजबूत करने का काम भी कर रहे हैं ।उनमें से एक दो का दावा भी काफी मजबूत था। लेकिन पार्टी का निर्णय अंतिम होता है फिलहाल तो उन्हें सब्र करना पड़ेगा।


















































