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नामांकन में धांधली का आरोप, दिव्या मदेरणा, मथानिया थाने के बाहर रातभर धरने पर

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

निकाय चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन मथानिया में गरमाया सियासी माहौल, दिव्या मदेरणा ने लगाया चुनाव नियमों के उल्लंघन का आरोप; प्रशासन-पुलिस के अधिकारियों से कई दौर की वार्ता के बाद खत्म हुआ धरना

जोधपुर। राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता के बाद अब कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और ओसियां की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा एक बार फिर स्थानीय राजनीति में सक्रिय नजर आईं। निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन मथानिया में कथित तौर पर नामांकन प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप को लेकर दिव्या मदेरणा ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने भाजपा विधायक के रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के कक्ष में प्रवेश को चुनाव नियमों के विपरीत बताते हुए कार्रवाई की मांग की और मथानिया पुलिस थाने के बाहर समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गईं।

नामांकन के अंतिम दिन हुआ विवाद

प्रदेश में निकाय चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 27 अगस्त से 31 अगस्त तक चली। 31 अगस्त को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन था और नामांकन का निर्धारित समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक था।

इसी दौरान मथानिया में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भाजपा विधायक भैराराम सियोल के रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में प्रवेश करने को लेकर कांग्रेस नेता दिव्या मदेरणा ने आपत्ति जताई।

दिव्या मदेरणा का आरोप है कि निर्धारित समय दोपहर 3 बजे समाप्त होने के बाद स्थानीय भाजपा विधायक को रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में प्रवेश कराया गया। उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया और नियमों का उल्लंघन बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

दिव्या बोलीं- कार्यकर्ताओं का फोन आया तो तुरंत पहुंची

धरने के दौरान दिव्या मदेरणा ने आरोप लगाया कि मथानिया थाना अधिकारी ने 3 बजे की समय सीमा समाप्त होने के बाद भाजपा विधायक को रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में प्रवेश करवाया। उनका कहना था कि यह चुनाव नियमों के खिलाफ है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

दिव्या ने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने उन्हें फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। वह उस समय क्षेत्र में ही थीं, इसलिए सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचीं। उनके पहुंचने तक भाजपा विधायक वहां से निकल चुके थे।

भाजपा विधायक का पलटवार- 2:56 बजे आरओ कक्ष में पहुंचा था

वहीं, भाजपा विधायक भैराराम सियोल ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया। सियोल के अनुसार, नामांकन दाखिल करने के लिए निर्धारित समय समाप्त होने में कुछ ही मिनट बाकी थे, तभी वे अपनी पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन दाखिल करवाने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में पहुंचे थे।

सियोल का दावा है कि जब उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में प्रवेश किया, उस समय 2 बजकर 56 मिनट हुए थे। उनके मुताबिक नियमों के अनुसार निर्धारित समय तक आरओ के कक्ष में प्रवेश किया जा सकता है, इसलिए उनके प्रवेश को नियम विरुद्ध बताना उचित नहीं है।

आरओ कार्यालय से थाने तक पहुंचा विवाद

मदेरणा ने इस मामले को केवल नामांकन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे सरकार के राजनीतिक प्रभाव और प्रशासन-पुलिस की भूमिका से जोड़ते हुए पहले रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में कार्रवाई की मांग की। इसके बाद वे मथानिया पुलिस थाने के बाहर समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गईं।

दिव्या मदेरणा ने अधिकारियों से सीधे बातचीत करने और मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। देखते ही देखते बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी मौके पर जुट गए।

रातभर चला धरना, कई दौर की वार्ता

दिव्या मदेरणा अपने समर्थकों के साथ रातभर धरने पर बैठी रहीं। इस दौरान प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों की ओर से उन्हें समझाने और मामले का समाधान निकालने के लिए कई दौर की बातचीत हुई।

अलग-अलग अधिकारी मौके पर पहुंचे और दिव्या से वार्ता की, लेकिन शुरुआती दौर में सहमति नहीं बन सकी। मदेरणा अपनी मांगों पर अड़ी रहीं और कार्रवाई का आश्वासन मिलने तक धरना जारी रखने की बात कही।

आला अधिकारियों की मौजूदगी में बनी सहमति

सुबह प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दिव्या मदेरणा और उनके समर्थकों से अंतिम दौर की बातचीत की। काफी देर चली वार्ता के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद दिव्या मदेरणा ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

मथानिया का यह घटनाक्रम निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस और भाजपा के बीच स्थानीय स्तर पर बढ़ती राजनीतिक तल्खी का नया उदाहरण बनकर सामने आया है। अब पूरे मामले में प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों पर सबकी नजर रहेगी।

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