
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
भरतपुर, बयाना । ( राजेंद्र शर्मा ) बयाना उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत नहरौली, गांव नगला वर्धा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत स्कूल में टीचरों की मनमानी से बच्चे और उनके अभिभावक खासे परेशान है । दरअसल इस स्कूल में दो महिला टीचर तैनात हैं। जिनमें से एक अधिकांश बीमारी के बहाने छुट्टी पर रहती है और दूसरी कभी कबार आती है । जब मन चाहे तब छुट्टी कर लेती है। ऐसे में यहां पढ़ने वाले 60 से 70 बच्चों का भविष्य अंधकार में हो रहा है।
बच्चों के परिजनों का कहना है कि स्कूल में दो ही टीचर है या तो टीचरों की संख्या बढ़ाई जाए या फिर इन टीचरों को पाबंद किया जाए। लगातार बीमार रहकर या बीमारी के नाम पर छुट्टियां करना आए दिन का काम है। छुट्टी लेकर स्कूल पर ताले लगे रहना उचित नहीं है, आज भी जब बच्चे घर से स्कूल पहुंचे तो स्कूल पर ताले लटके हुए थे । जब 10:00 बजे तक मैडम नहीं आई तो बच्चों के अभिभावक मौके पर पहुंचे, उन्होंने इसका विरोध जताया, अभिभावकों का कहना है कि इस तरह से बच्चों की जब पढ़ाई नहीं होगी तो फिर स्कूल भेजने का क्या फायदा।
एक तरफ तो लोग सरकारी नौकरी लगने के लिए लगातार सरकारों पर दबाव डालते हैं, दूसरी तरफ जब नौकरियां लग जाती है, तब उसे ईमानदारी से नहीं करते। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों में लगातार स्टूडेंट की संख्या घट रही है और प्राइवेट स्कूलों में जहां चार 5000 ₹10000 टीचर को तनख्वाह मिलती है, वहां पर स्टूडेंट की लाइन लगी हुई है । जबकि लाखों रुपए का वेतन उठाने वाले सरकारी टीचर लापरवाही भरते हैं ,जिसका खामियाजा आम स्टूडेंट को भुगतना पड़ता है । जो टीचर ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाते हैं ,उन्हें भी इस बात के ताने सुनने पड़ते हैं, परिजनों ने सरकार से मांग की है, की जो लापरवाह टीचर है उन्हें हटाया जाए और यहां पर टीचरों की संख्या बढ़ाई जाए ,जिससे कि बच्चों का भविष्य सुधर सके।


















































