संक्रमण …………
धुआं हवाओं में मिलकर फिर से अदृश्य हो जाता है पर वर्ष 2019 के कोविड का धुआं अब 2025 में धीरे-धीरे पुनः बवंडर बन जाने की ओर अग्रसर है। उसके बचे हुए सूक्ष्म जीव के कुछ अंगारें भभक कर उसके जिन्दा होने की हकीक़त बता रहे हैं, जिसने उसे धुंध बना कर सबकी आँखों से ओझल कर दिया था और अब ये बादल बनकर अपने अतीत के साथ-साथ कई और रहस्यमयी बूंदों को बरसाकर, एक बार फिर से मानव शरीर को संक्रमित करने की फ़िराक में है। हम सभी कोरोना का वो विकराल रूप देख चुके हैं कि कैसे एक वायरस ने इंसान को अपने आप को एक बंद कमरे में भी सबसे अलग थलग रहने को मजबूर कर दिया था| सारे रिश्ते ,नाते प्रेम, मोह सब अपनी-अपनी जान बचाने में लगे हुए थे । उस समय इस संक्रमण ने मानव से मानव का बहिष्कार दिखा दिया था। लाशों के ढेर चीख़-चीख़ कर अपनों से गुहार लगा रहे थे कि आओ हमारा अंतिम संस्कार कर दो, पर सभी लोगों के संस्कार धरे के धरे रह गए थे ,उस समय की भयावह स्थिति पर मैंने कुछ शब्दों की रचना की थी कि कैसे मानव की मानवता के साथ-साथ संसार की कई नीतियों का भी अंत हो गया था।
मैंने ये कभी नहीं चाहा था कि मेरी ये रचना फिर से लोगों के सामने आये पर एक बार फिर कोविड के उस अतीत का धुआं सामने मंडरा रहा है इसे यूँ ही नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है|
आदम का आदम पे, वार हुआ,
इस खल्क से जिस्म,बहिष्कार हुआ |
एक सोच पर, नज़ारा – ऐ – दहर तो देखिये,
वो अपनी करतूत पर, ना शर्मसार हुआ |
उसका ना कोई धर्म है, ना उसकी कोई जमात है,
जो केवल एक है, उसका ना कोई तरफ़दार हुआ |
ना ही राम का राज रहा,ना ही कृष्ण की नीतियाँ,
ये कौनसी राजनीति में,लोकतंत्र गिरफ़्तार हुआ |
पूछो एक बार ख़ुद की रूह से,अपने गुनाह तुम,
वो कौनसा पाप है,जो तुमसे हर बार हुआ |
जिसे किसी ने नहीं देखा, उस पर दावा क्यूँ ?
इन्सा ख़ुद ही ख़ुद का, परवरदिगार हुआ |
ना ही जन्म की ख़बर तुझे,ना ही मौत का पता ,
फिर कैसे इस जहान पर,तेरा अधिकार हुआ |
वो जो दिखा रहा है,उसका फ़रमान तो समझ,
मिट जायेगा सब कुछ,गर ये नागवार हुआ |
आदम का आदम पे वार हुआ……
आज फिर से इन पंक्तियों के माध्यम से मैं सभी को उस दौर की याद दिलाना चाहता हूँ इससे पहले की कोविड फिर से एक बार इस संसार को संक्रमित करें हम सभी को अभी से सतर्क रहने की आवश्यकता है। अभी किसी का भी इस पर ध्यान नहीं जा रहा है, पर दुनिया से बेखबर लोगों तक इस खबर का जाना जरुरी है। देश में कोरोना वायरस के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
भारतीय सरकार को अभी से इस पर नियंत्रण करने का प्रयास करना चाहिए पर इसके साथ-साथ आम नागरिकों को भी सतर्कता बरतते हुए अभी से अपना और अपनों का ख़याल रखने का जिम्मा उठाना पड़ेगा,आगे क्या होने वाला है ये तो किसी को भी नहीं पता पर हाँ 2019 के इस संक्रमण का प्रभाव हम सभी देख चुके हैं। हो सकता है की इस बार का ये संक्रमण पहले से भी ज्यादा आक्रामक रूप ले-ले और कई शोधकर्ता इसके आने वाले विकराल रूप की भविष्यवाणी कर चुके है ,चाहे वो विज्ञान से जुड़े हों या आध्यात्मिकता से ,अभी हाल ही में जापान की मंगा कलाकार रियो तात्सुकी जिन्हें जापानी बाबा वेंगा के नाम से भी जाना जाता है। जिनकी अधिकतर भविष्यवाणियां सही निकली हैं और इस पर इसलिए यकीन करना होगा कि उन्होंने कोविड 19 की महामारी को लेकर भी बहुत पहले ही अपनी डायरी में इसका उल्लेख कर दिया था ,जो की बाद में सही साबित हुआ और कोरोना के फिर से लौट आने पर उनके इस सन्देश पर विचार करना ही होगा। 
हालांकि उनकी इस बात पर कई लोगों का मानना है कि कोरोना वायरस विज्ञान से जुड़ा मामला ज्यादा है, इसलिए पहले की तरह विज्ञान के तरीके से ही इस पर काबू पाया जा सकता है । मैं भी इस बात से पूर्ण रूप से सहमत हूँ पर विज्ञान से जुड़े शोधकर्ताओं को अपने शोध में जल्दी ही सफलता पानी होगी,हम चाहे कितने ही प्रगतिशील क्यों ना हो जायें पर ऐसी भयंकर आपदाओं में सबसे पहले आम नागरिकों का नुकसान सबसे ज्यादा होता है । वैसे इस लेख के माध्यम से मैं लोगों को डरा नहीं रहा हूँ बल्कि सतर्कता और सुरक्षा की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करना ही मेरा उद्देश्य है । वैसे तो सरकार अभी से इस विषय की गंभीरता पर अपना कार्य कर रही है पर मेरा मानना है की उसे अभी से भारत के नागरिकों को कोविड की आपातकालीन परिस्थितियों से तैयार रहने का सन्देश देना प्रारंभ कर देना चाहिये ।
कहीं ऐसा ना हो की पहले की तरह हालात हो जायें और लोगों को इस से संभलने का अवसर भी ना मिले। अब देखना ये है की सरकार की दी गई वैक्सीन देश के नागरिकों को कहाँ तक शील्ड कर पाती है ,पर इसके साथ-साथ सरकार को ये भी सोचने की आवश्यकता है की भारत की बढ़ती हुई प्रगति को संक्रमित करने के लिए कहीं ये संक्रमण किसी दुश्मन देश की युद्ध नीति का हिस्सा तो नहीं और अगर ऐसा है तो उसे अभी से विफ़ल करना होगा। अगर इंसान अपने विज्ञान के ज्ञान को चरम पर ले जा चुका है तो फिर कैसे वो कोविड की इस बीमारी को रोक नहीं पा रहा है, ये विज्ञान की विफलता है या कोई सोची समझी साज़िश और अगर ये वाकई में एक प्राकृतिक आपदा है। तो ये भी याद रखा जाये कि अक्सर कई विषयों में विज्ञान भी प्रकृति के आगे हार जाता है । मानव-मानव का एक बार फिर से बहिष्कार करे, उससे पहले ही इंसान को अपने अस्तित्व की रक्षा स्वयं ही करनी होगी तभी इस संक्रमण को रोका जा सकेगा ।
कोमल अरन अटारिया
निर्देशक,लेखक,साहित्यकार

















































