सैयारा — एक आत्मा की खोज या एक प्रेम की यात्रा?

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

फिल्म समीक्षा
हेमराज तिवारी

“कुछ कहानियाँ काल्पनिक लगती हैं, जब तक वो आपकी आंखों के सामने जी न ली जाएँ।”

सैयारा, साल 2025 की बहुप्रतीक्षित फिल्म, सिनेमाघरों में एक प्रश्न बनकर आती है — क्या यह IIT बाबा की वास्तविक कहानी है? या सिर्फ सिनेमा की रचनात्मक स्वतंत्रता का जादू?

कहानी:

फिल्म की आत्मा एक ऐसे युवक की है जो IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से निकलता है, मगर दुनिया की भीड़भाड़ में खुद को खोता नहीं, बल्कि अपने ‘स्व’ को खोजने निकल पड़ता है। जहां अन्य लोग सफलता को पैसा, पद या प्रेम में ढूंढते हैं, वह युवक उसे त्याग, संघर्ष और आध्यात्मिक आत्म-ज्ञान में ढूंढता है।

अभिनय:

मुख्य किरदार निभाने वाले अभिनेता ने एक युवा वैज्ञानिक से आध्यात्मिक गुरु में बदलते व्यक्ति की भूमिका को बेहद संवेदनशीलता से निभाया है। आँखों में खोया हुआ भाव, और फिर एक जगा हुआ तेज — यह बदलाव दर्शकों को हिला देता है।

संगीत और निर्देशन:

संगीत फिल्म की आत्मा को संगीतमय बनाता है। विशेषकर टाइटल ट्रैक “सैयारा — जो न थमा, न झुका, बस बहता गया” दिल को छू जाता है।
निर्देशक ने स्पष्ट किया है कि यह कहानी IIT बाबा (अभय सिंह) की वास्तविक जीवन से प्रेरित है। हालांकि Wikipedia जैसे कुछ आधिकारिक प्लेटफार्म इसे कोरियन फिल्म A Moment to Remember से प्रभावित बताते हैं।

सच्चाई या कल्पना?

IIT बाबा — एक ऐसा नाम जिसने भारत की युवा पीढ़ी को यह सोचने पर मजबूर किया कि “सफलता केवल आय नहीं, आत्मा की शांति भी है।”
यदि यह फिल्म उनके जीवन से प्रेरित है, तो यह सिनेमा का साहसिक और क्रांतिकारी प्रयोग है। लेकिन यदि यह केवल भावनाओं को बेचने का माध्यम है, तो यह एक छलावा भी बन सकता है।

सैयारा केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक प्रश्नचिह्न है इस समाज के सामने
क्या हम अपनी पढ़ाई, नौकरी, और परिवार की दौड़ में यह भूल जाते हैं कि हम कौन हैं?

फिल्म किसी उपदेश की तरह नहीं, एक आध्यात्मिक प्रेम कथा की तरह सामने आती है — जिसमें नायक केवल प्रेमी नहीं, एक साधक भी है।

रेटिंग: ★★★★☆ (4/5)

देखें यदि: आप जीवन की गहराइयों को सिनेमा में महसूस करना चाहते हैं।

छोड़ें यदि: आपको केवल मसालेदार एंटरटेनमेंट की तलाश है।

यदि यह फिल्म सच में IIT बाबा की यात्रा पर आधारित है, तो यह सिनेमा नहीं, एक सनातनी यात्रा है — जो केवल आंखों से नहीं, आत्मा से देखी जानी चाहिए।
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