जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब? विभाग के अधिकारी- जिला प्रशासन पर हो एक्शन
खास बच्चों की आवाज सुन लेते मास्टर जी तो आज बच्चों को जान नहीं गंवानी पड़ती
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
सुनील सिंह -( गंगधार- झालावाड़) वरिष्ठ संवाददाता
झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की छत गिरने से भयावह हादसा हुआ।इसमें 7बच्चों की मौत हो गई है। शिक्षा विभाग ने पांच शिक्षकों को निलंबित किया है। हादसे में 27 बच्चे घायल हुए हैं। इनमें से 8 की हालत गंभीर बनी हुई है।
स्कूल की छत गिरी,35 बच्चे मलबे में दबे
राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह स्कूल की छत गिरने से दर्दनाक हादसा हुआ। यहां एक सरकारी स्कूल की बिल्डिंग की छत अचानक गिर गई, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। प्रार्थना सभा के दौरान हुई इस घटना में 7 बच्चों की मौत हो गई है। शिक्षा विभाग ने पांच शिक्षकों को निलंबित किया है।जानकारी के अनुसार स्कूल में हादसा उस वक्त हुआ जब प्रार्थना चल रही थी।
शिक्षक हादसे के वक्त भवन से बाहर प्रार्थना करवा रहे थे, बच्चे बोले कंकर गिर रहे हैं मास्टरों ने अनसुना कर दिया
हादसे के समय स्कूल के शिक्षक भवन के बाहर थे। जबकि छात्र स्कूल भवन के अंदर प्रार्थना कर रहे थे। इस वजह से शिक्षक हादसे का शिकार नहीं हुए हैं। इस हादसे में करीब 27 बच्चे घायल हुए हैं । इनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर रूप से घायल बच्चों को झालावाड़ के अस्पताल में भर्ती किया गया है। जहां उनका इलाज चल रहा है। स्कूल की छत गिरने के बाद गांव वालों ने मलबे से बच्चों को निकालना शुरू किया। इसके बाद जेसीबी मशीन की मदद ली गई।
स्कूल प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी को पूर्व में दी सूचना
स्कूल की छत काफी समय से जर्जर हो रही थी और लगातार हो रही भारी बारिश के बाद छत के गिरने का अंदेशा भी बना हुआ था। इसके बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा मासूम बच्चों की जान चली गई। गंभीर घायल बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। मलबा हटाने में रेस्क्यू टीम के साथ ग्रामीण भी पूरी तरह से लगे रहे। झालावाड़ जिला कलक्टर अजय सिंह राठौर ने कहा कि सभी बच्चों को बाहर निकाल लिया गया है। इस हादसे में अब तक 7 बच्चों की मौत हो गई है।
बच्चों के परिजनों को मुआवजे का एलान अब तक क्यों नहीं?
सरकारी स्कूल की बिल्डिंग गिरने से दर्दनाक हादसा हुआ है। अब तक सरकार को इस मामले में मृतक बच्चों के परिजनों को आर्थिक पैकेज का ऐलान करके चैक सौंप देने चाहिए थे। ेघायल बच्चों के लिए भी कुछ आर्थिक मदद की घोषणा होनी चाहिए थी, जो अब तक नहीं हुई। इससे लोगों में आक्रोश है। अधिकांश बच्चे गरीब- किसान- मजदूर वर्ग के हैं ।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, घरों में पसरा मातम, नहीं जले चूल्हे
एक साथ एक ही स्कूल के 7 बच्चों की दर्दनाक मौत से पूरे गांव में कोहराम मच गया। गांव में सवेरे से अब तक चूल्हे नहीं जले। पूरे गांव में मातम पसर गया है। स्कूल के आस- पास लोगों की भीड़, पुलिस ,प्रशासन के लोग , रेस्क्यू टीम और मीडिया का जमावड़ा है। बीच- बीच में मृतक बच्चों के परिजनों की चीख -पुकार से हर आदमी की आंखे नम है। गांव में मरघट सा मातम पसरा है। बस जिनके घायल है वे उनहें बचाने के लिए भागदौड़ कर रहे है। जिनके चले गए वे आज के दिन को कोस रहे है। अपनी किस्मत, गरीबी, हालात और प्रशासन को कोस रहे है। खास समय पर स्कूल की मरम्मत हो जाती तो ये दिन नहीं देखना पड़ता।
