“फर्ज़ी पहचान की असली चोट: जब कोई और बन जाए आप”- आश्चर्य तिवारी
रविवार की सुबह चाय के साथ जैसे ही सोशल मीडिया खोला, एक मित्र का मैसेज आया – “भाई, इंस्टाग्राम पर आपके नाम से कोई फेक प्रोफाइल बनी है… स्टोरी डाल रहा है, लोगों से मैसेज में पैसे मांग रहा है।”
मैं चौंक गया।
क्योंकि मेरी असली पहचान को किसी ने अपने झूठ का चेहरा बना लिया था।
क्या ये बस एक ‘फेक प्रोफाइल’ है?
नहीं।
यह आपकी निजता पर हमला है।
यह उस विश्वास की हत्या है जो लोग आपके नाम, आपकी छवि और आपके कार्य से जोड़ते हैं।
आज सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स बनाना उतना ही आसान है जितना किसी की तस्वीर कॉपी करना। लेकिन इन नकली प्रोफाइलों से होने वाला नुकसान — आपकी साख, आपकी सुरक्षा, और आपकी मानसिक शांति — तीनों को चुराकर ले जाता है।
सवाल ये नहीं कि ‘क्यों बना?’
सवाल ये है — क्या हमने इसे रोका?
जब भी कोई इस तरह से आपके नाम का दुरुपयोग करे, तुरंत 3 चीज़ें करें:
स्क्रीनशॉट लें – हर स्टोरी, पोस्ट और प्रोफाइल का।
इंस्टाग्राम पर रिपोर्ट करें – प्रोफाइल के 3 डॉट्स > Report Account > It’s pretending to be someone else > Me
साइबर क्राइम रिपोर्ट करें – cybercrime.gov.in पर जाएं, “Report Other Cyber Crime” चुनें और सबूत अपलोड करें।
ये सिर्फ सोशल मीडिया का मामला नहीं, यह निजता के खिलाफ युद्ध है।
किसी का नाम चुराकर कोई ‘ठग’ नायक बन जाता है और असली व्यक्ति समाज के सामने ‘शक के घेरे’ में आ जाता है।
सोचिए, अगर कोई बच्ची अपने शिक्षक के नाम से बनी फेक आईडी पर कुछ अश्लील सामग्री देखे?
अगर कोई व्यापारी किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से बने अकाउंट पर ‘रिश्वत’ की डील कर दे?
अगर कोई पत्रकार — यानी मैं — किसी ऐसे पोस्ट को लेकर सवालों के घेरे में आ जाऊँ जो मैंने कभी लिखा ही नहीं?
यह लड़ाई तकनीक की नहीं, जागरूकता और कार्रवाई की है।
एक पत्रकार के रूप में मैं कह सकता हूँ – आज का सबसे ज़रूरी नैतिक कवच “डिजिटल विवेक” है।
अपने बच्चों को सिखाइए कि सोशल मीडिया पर हर प्रोफाइल सच्चा नहीं होता।
अपने बुजुर्गों को समझाइए कि हर मैसेज देने वाला रिश्तेदार नहीं होता।
खुद को तैयार कीजिए — असली को नकली से बचाने के लिए।
आपके नाम से जुड़ी छवि केवल आपकी नहीं होती, वह समाज की स्मृति का हिस्सा बन जाती है।
उसकी रक्षा कीजिए, क्योंकि
“जहाँ पहचान छिन जाए, वहाँ अस्तित्व मिटने में देर नहीं लगती।”
किसी फेक आईडी को रिपोर्ट कीजिए,
और एक असली इंसान को उसकी पहचान लौटाइए।












































