लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
आमेर की केशव राय कल्याण मंदिर का संबंध डिग्गी कल्याण जी से है
जितेन्द्र सिंह शेखावत, वरिष्ठ पत्रकार
राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी आमेर, जो कभी ढूंढाड़ राज्य की राजधानी रही, अपने किलों और महलों के साथ-साथ प्राचीन मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। सागर रोड पर स्थित प्रतिहार कालीन विष्णु स्वरूप भगवान केशव राय कल्याण जी का मंदिर लगभग ग्यारह सौ वर्ष पुराना बताया जाता है।
प्रतिहार काल का अद्भुत शिल्प
मंदिर की स्थापना प्रतिहार काल में हुई थी। गर्भगृह, स्तंभ और प्रतिमाएं प्रतिहार कालीन कला शैली को जीवंत करती हैं। मंदिर का मुख्य द्वार और गर्भगृह की चौखट अत्यंत कलात्मक और नक्काशीदार है।
मान सिंह प्रथम के समय जीर्णोद्धार
आमेर नरेश महाराजा भगवंत दास (मान सिंह प्रथम के पिता) ने करीब 400 वर्ष पहले मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। संवत 1631 का शिलालेख इस बात की पुष्टि करता है। इसमें पुरोहित कान्हड़ जी का नाम अंकित है, जिन्होंने उस समय जीर्णोद्धार कराया।
मूर्तियां और कलात्मक सौंदर्य
गर्भगृह में सफेद संगमरमर की भगवान विष्णु (कल्याण रूप) की प्रतिमा विराजमान है।
काले पत्थर से बनी भगवान कृष्ण स्वरूप केशवराय जी की प्रतिमा भी स्थापित है।
मंदिर में प्रवेश द्वार के ऊपर गणेश प्रतिमा, मंडप और अर्धमंडप भी अत्यंत सुघड़ शिल्प में बने हुए हैं।
सामने गरुड़ जी की प्रतिमा स्थापित है।
विशेषताएं
इतिहासकारों और धरोहर शोधकर्ताओं के अनुसार, यहां विराजमान कल्याण जी की प्रतिमा डिग्गी वाले कल्याण धणी मंदिर से काफी मिलती-जुलती है। अंतर सिर्फ इतना है कि डिग्गी वाले कल्याण धणी की प्रतिमा के मुख मंडल पर हीरा जड़ा हुआ है।
अन्य प्राचीन मंदिर
आमेर में आठवीं शताब्दी का एक और कल्याण जी मंदिर भी है, जो अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर के दक्षिण दिशा में स्थित है।









































