लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पादूकलां। कस्बे में वैशाख माह की विकट संकष्टी चतुर्थी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं पति की दीर्घायु की कामना की।
राजस्थानी परंपरा के अनुसार महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर मंदिर पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गौरी-गणेश पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने पूजा की थाली सजाकर मंगल गीत गाते हुए विधिवत पूजा-अर्चना की और कथा श्रवण किया।
कथावाचक विमला देवी, सुमन और पूजा ने व्रत कथा का श्रवण कराया। धार्मिक मान्यता के अनुसार विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान भगवान गणेश के विकट स्वरूप को समर्पित होता है, जो भक्तों के जीवन के सभी संकटों का नाश करते हैं।
महिलाओं ने सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लिया और पूरे दिन सात्विक रहकर पूजा की तैयारियां कीं। संध्या समय गणेश जी को लाल वस्त्र पर स्थापित कर सिंदूर, अक्षत, पुष्प और 21 दूर्वा अर्पित की गई तथा मोदक और लड्डू का भोग लगाया गया।
रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध, जल और अक्षत से अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया गया। मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर जीवन के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
