लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। भजनलाल शर्मा ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और व्यक्तित्व निर्माण के आधार होते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। 
मुख्यमंत्री जयपुर स्थित आदर्श विद्या मंदिर, राजापार्क में बहुउद्देशीय सभागार के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और भामाशाहों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह सभागार सामूहिक प्रयासों और समाज के सहयोग का प्रतीक है।
शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श विद्या मंदिर जैसे संस्थान शिक्षा के साथ-साथ सेवा, सहयोग, करुणा और “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि जिस देश के बच्चे अपनी संस्कृति और विरासत को समझते हैं, उसका विकास सुनिश्चित होता है।
युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत
उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी पूंजी है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं और उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करते हैं। एक शिक्षित युवा न केवल अपना, बल्कि पूरे समाज और देश का भविष्य उज्ज्वल बनाता है।
हर बच्चे तक पहुंचे शिक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे—चाहे वह शहर में हो या गांव में। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है।
रोजगार और पारदर्शिता पर जोर
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है। 4 लाख सरकारी और 6 लाख निजी क्षेत्र में रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 1.25 लाख नियुक्तियां दी जा चुकी हैं और बड़ी संख्या में भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं।
साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्यकाल में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
इस अवसर पर डॉ. प्रेम चन्द बैरवा ने भी कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद् और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।