लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
अजमेर (नितिन मेहरा)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर जनता के हित में कार्य करते हैं। सत्ता जनता से आती है और जनप्रतिनिधियों का दायित्व शासक नहीं बल्कि सेवक के रूप में काम करना है। उन्होंने कहा कि विधानसभा का हर मिनट जनता के हित में समर्पित होना चाहिए, क्योंकि सदन का समय जनता की अपेक्षाओं और विश्वास से जुड़ा होता है।
मुख्यमंत्री जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा लिखित पुस्तकों “संसदीय संस्कृति का उत्कर्ष: नवाचारों के दो वर्ष” और “सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि” के नवीन संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और दोनों पुस्तकों का अनावरण किया।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने कार्यकाल में संसदीय परंपराओं का सम्मान करते हुए कई नवाचार किए हैं, जिससे राजस्थान विधानसभा को अधिक जीवंत, उत्तरदायी और जनोन्मुख बनाने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि परंपरा और नवाचार साथ-साथ चलें तो लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होती हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है और विपक्ष के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। राजस्थान विधानसभा की परंपरा मजबूत संसदीय मूल्यों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर आधारित रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में छात्रों को विधानसभा का भ्रमण भी कराया गया है, जिससे उनमें लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति समझ और प्रेरणा बढ़ी है।
उन्होंने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर आधारित पुस्तक “सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि” का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी का जीवन दर्शन राष्ट्र प्रथम की भावना से प्रेरित रहा। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष और सपनों की अभिव्यक्ति है।
नई सुविधाओं से और सशक्त होगी विधानसभा: देवनानी
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विधानसभा को अधिक जीवंत, उत्तरदायी और जनोन्मुख बनाने के लिए कई नवाचार किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि विधानसभा संग्रहालय को जनदर्शन के लिए खोलने के बाद अब तक करीब 50 हजार लोग इसका अवलोकन कर चुके हैं। संग्रहालय में संविधान गैलरी और वंदे मातरम् गैलरी विकसित की गई हैं। साथ ही परिसर में कारगिल शौर्य वाटिका, हर्बल वाटिका और नक्षत्र वाटिका भी विकसित की जा रही हैं।
देवनानी ने बताया कि विधानसभा के आधुनिकीकरण के लिए सेंट्रल हॉल के निर्माण के लिए 14 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। भविष्य में परिसीमन के बाद बढ़ने वाली सदस्य संख्या को ध्यान में रखते हुए लगभग 280 सदस्यों की क्षमता वाले नए हॉल के विकास के लिए भी 14 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विधानसभा को पूर्णतः डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। समितियों की बैठकों में डिजिटल हस्ताक्षर व्यवस्था शुरू की गई है और प्रवेश पास भी पेपरलेस किए जा रहे हैं। भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के कारण विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के 97 प्रतिशत उत्तर समय पर उपलब्ध कराए गए।
नेता प्रतिपक्ष टिकराम जूली ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है, जहाँ पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलता है। उन्होंने विधानसभा को डिजिटल और पेपरलेस बनाने के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर मंत्रीमंडल के सदस्य, विधायकगण, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद् और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।















































