लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
BJP ने साधा निशाना
नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने फैसला किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसे अपने 1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव के अनुरूप बताया है।
CWC की बैठक में हुआ फैसला
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर पार्टी की पुरानी स्थिति पर चर्चा हुई। करीब चार घंटे चली बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि भविष्य में पार्टी के कार्यक्रमों में गीत के पहले दो अंतरों का ही गायन किया जाएगा।
कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय गीत के सम्मान को कम करने वाला नहीं है, बल्कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा लिए गए निर्णय को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से है। उस समय भी पहले दो अंतरों को ही सार्वजनिक और कांग्रेस के कार्यक्रमों के लिए स्वीकार किया गया था।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस का तर्क है कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा ऐतिहासिक गीत है और पार्टी ने हमेशा इसका सम्मान किया है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं का भी इससे जुड़ाव रहा है।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, 1937 में गीत के कुछ बाद के अंशों को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। इसके बाद कार्यसमिति ने पहले दो अंतरों को ही सार्वजनिक आयोजनों में अपनाने का निर्णय लिया था।
भाजपा ने कांग्रेस पर बोला हमला
कांग्रेस के फैसले के बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने का आरोप लगाया और पार्टी की तुलना ‘नई मुस्लिम लीग’ से की। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस का यह फैसला राष्ट्रीय गीत के प्रति उसके रवैये को दर्शाता है।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने राजनीतिक और वोट बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्रीय भावना से जुड़े मुद्दे पर समझौता किया है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए अपने फैसले को ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़कर बचाव किया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है, जब राष्ट्रीय गीत के इतिहास और इसके विभिन्न अंतरों को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस चल रही है। केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक आयोजनों में गीत के पूर्ण संस्करण को लेकर जोर दिए जाने के बीच कांग्रेस का दो अंतरों तक सीमित रहने का फैसला राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।