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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर,।(आर एन सांवरिया) वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के चुनाव टालकर प्रशासक के माध्यम से जनप्रतिनिधियों का अधिकार छीनकर प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों के विकास को अवरूद्ध करने का कार्य किया जा रहा है तथा राजस्थान सरकार प्रदेश में नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन एवं पुर्नगठन में नियमों एवं जनभावनाओं के बजाय राजनीतिक दुर्भावना के आधार पर सीमांकन/वार्डों का पुर्नगठन किया जा रहा है। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने व्यक्त किए।
डोटासरा ने कहा कि भारतीय संविधान जिसे भाजपा बदलना चाहती है के अनुच्छेद 243-ई में स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक पंचायत अपने प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से 5 वर्ष तक बनी रहेगी, इससे अधिक नहीं। उन्होंने कहा कि किसी पंचायत का गठन करने के लिए निर्वाचन उसके विघटन की तारीख से 6 माह की अवधि की समाप्ति के पूर्व पूरा किया जाएगा और किसी पंचायत की अवधि की समाप्ति के पूर्व उस पंचायत के विघटन पर गठित की गई कोई पंचायत उस अवधि के केवल शेष भाग के लिए बनी रहेगी जिसके लिए विघटित पंचायत के अधीन बनी रहती, यदि वह इस प्रकार विघटित नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-यू में वर्णित प्रावधान के अनुसार प्रत्येक नगरपालिका की अवधि प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से 5 वर्ष तक बनी रहेगी इससे अधिक नहीं और किसी भी नगरपालिका का गठन करने के लिए निर्वाचन उसकी अवधि की समाप्ति के पूर्व अथवा विघटन की तारीख से 6 माह की अवधि की समाप्ति के पूर्व पूरा किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान है कि किसी नगरपालिका की समाप्ति की अवधि से पूर्व उस नगरपालिका के विघटन पर गठित की गई कोई नगरपालिका उस अवधि के केवल शेष भाग के लिए बनी रहेगी जिसके लिए विघटित नगरपालिका के अधीन बनी रहती यदि वह इस प्रकार विघटित नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि यही प्रावधान राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 17 एवं राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 7 में भी वर्णित है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के 49 नगर निकायों के चुनाव जो नवम्बर, 2019 में सम्पन्न हुए थे जिनका कार्यकाल नवम्बर, 2024 में ही पूर्ण हो गया किन्तु इन निकायों के चुनावों का कार्यक्रम जारी नहीं हुआ बल्कि सरकार ने प्रशासक नियुक्त कर रखे हैं। इसी प्रकार 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी, 2025 को समाप्त हो गया व 704 का 31 मार्च, 2025 को समाप्त हो रहा है इनके भी चुनाव करवाने हेतु कोई अधिसूचना राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नहीं की गई जो कि संविधान एवं कानून की मंशा के विरूद्ध है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुसार किसी भी नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थान के कार्यकाल की समाप्ति के 6 माह पूर्व चुनाव की प्रक्रिया हो जानी आवश्यक है, साथ ही यह भी निर्णय पारित हुआ है कि नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव पुर्नसीमांकन के नाम पर स्थगित नहीं किये जा सकते है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2024 में स्टेट पंजाब ऑफ बनाम बेअंत कुमार व अन्य में स्पष्ट रूप से निर्णित किया गया है कि परिसीमन के नाम पर पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के चुनाव स्थगित नहीं किये जा सकते हैं तथा 5 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व चुनाव प्रक्रिया प्रारम्भ करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 6 नगर निगम का कार्यकाल नवम्बर, 2025 में समाप्त होगा, 50 नगर निकायों का कार्यकाल दिसम्बर, 2025 में समाप्त होगा, 90 नगर निकायों का कार्यकाल फरवरी, 2026 में समाप्त होगा, इसी प्रकार 1 नगर निकाय मार्च, 2026 तक कार्यरत है, इसी प्रकार प्रदेश में 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल दिसम्बर, 2025, 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल सितम्बर, 2026, 22 पंचायत समिति अक्टूबर, 2026 तथा 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल दिसम्बर, 2026 तक है, इसी प्रकार 21 जिला परिषद् का कार्यकाल दिसम्बर, 2025, 6 जिला परिषद् का कार्यकाल सितम्बर 2026, 2 जिला परिषद् अक्टूबर 2026 तथा 4 जिला परिषद् का कार्यकाल दिसम्बर, 2026 तक है ऐसी परिस्थिति में इन नगर निकायों के चुनाव तो दिसम्बर, 2025 तक तो करवाये जा सकते हैं तथा 21 जिला परिषद् के भी चुनाव कराये जा सकते हैं किन्तु शेष 12 जिला परिषद् व शेष 130 पंचायत समितियों जिनका कार्यकाल सितम्बर-अक्टूबर व दिसम्बर, 2026 तक है का कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व यदि इनके चुनाव विघटन कर करवाये गये तो वो चुनाव केवल शेष अवधि के कार्यकाल के लिए ही करवाये जा सकते है। ऐसी परिस्थिति में ‘‘वन स्टेट- वन इलेक्शन’’ के नाम पर राज्य सरकार ना सिर्फ जनता को धोखा दे रही है बल्कि राजस्थान सरकार को जवाब देना चाहिए कि किस आधार पर प्रदेश की बजट घोषणाओं में वन स्टेट-वन इलेक्शन की बात राज्य सरकार ने रखी। उन्होंने कहा कि आज तक राज्य सरकार ने वन स्टेट-वन इलेक्शन पर ना तो कोई कार्य किया है और ना ही सार्वजनिक पटल पर इस मुद्दे पर कोई तथ्य राज्य सरकार ने रखे है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार प्रदेश में दिसम्बर, 2026 तक नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव नहीं करवा कर प्रशासक के माध्यम से इन संस्थाओं पर कब्जा रखना चाहती है क्योंकि अधिकांश नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व उनके चुनाव केवल मूल कार्यकाल की शेष अवधि के लिए ही करवाये जा सकते है। उन्होंने कहा कि जिन पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों का कार्यकाल पूर्ण हो गया है उनके चुनाव का कार्यक्रम अविलम्ब जारी होना चाहिए इसमें देरी संविधान के प्रावधानों तथा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 तथा राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 का खुल्ला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के समय पर चुनाव कराने के लिये सड़क पर संघर्ष करने से लेकर न्यायालय की शरण में जा सकती हैं। डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर हो इसके लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा राज्य के राज्यपाल/मुख्य निर्वाचन आयुक्त के नाम ज्ञापन दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज के तहत् ग्राम पंचायत का परिसीमन किया जा रहा है जिसके तहत् 3000 से 5500 की आबादी तक की ग्राम पंचायत में 15 प्रतिशत तक का विचलन के साथ नई ग्राम पंचायत गठित हो सकती है तथा 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन का कार्य 6 माह पूर्व प्रारम्भ होकर वोटर लिस्ट बन जानी चाहिये थी, किन्तु सरकार की मंशा साफ नहीं थी, इसलिये हाथ पे हाथ धरे बैठे रहे ताकि चुनाव टाले जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी ग्राम पंचायत की आबादी 5500 से ज्यादा है तो ही उसे तोड़ा जा सकता है अन्यथा हस्तक्षेप नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि पंचायत समिति और जिला परिषद् के पुनर्सीमांकन में किसी प्रकार के विचलन का प्रावधान नहीं है इसलिये 2011 की जनगणना के आधार पर जो पहले से बने हुये वार्ड हैं, वही रहने चाहिये, यदि कोई पंचायत समिति नई बनती है अथवा टूटती है या जिला नया बनता है तो ही वह परिसीमन के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निकायों के लिये राज्य सरकार सीमा बढ़ाकर वार्डों का परिसीमन करना चाह रही है जिसके तहत् कांग्रेस को समर्थन देने वार्डों को बड़ा बनाकर वार्ड घटाना चाहते हैं और भाजपा समर्थक मतदाताओं के वार्ड छोटे कर वार्डों की संख्या बढ़ाने की मंशा भाजपा सरकार रखती है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार केवल जनसंख्या के आधार पर 15 प्रतिशत के विचलन पर वार्डों के सीमांकन में बदलाव किया जा सकता है अन्यथा नहीं। उन्होंने कहा कि सबसे आपित्तजनक बात यह है कि भाजपा संविधान और कानून का तो अनुसरण नहीं कर रही है लेकिन इसके साथ ही पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन एवं पुनर्सीमांकन के लिये एक मंत्रीगण की मंत्रीमण्डलीय समिति का गठन किया गया है, उसक कमेटी की आज तक कोई बैठक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जो सरकार की गाईडलाईन जिला कलेक्टर, एसडीएम और ईओ के लिये भेजी गई उसके अनुसार ही कार्य करना है कानून भी यही है, किन्तु आश्चर्यजनक रूप से भाजपा एवं आरएसएस ने अघोषित रूप से पार्टी स्तर पर अपनी एक समिति गठित कर दी है जिसमें भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ एवं अरूण चतुर्वेदी व घनश्याम तिवाड़ी शामिल हैं जो अपने स्तर पर जिलों में कमेटी बनाकर ओटीएस में बैठकर कार्य कर रही है और पंचायती राज व नगर निकाय के अधिकारियों को बुलाकर उन पर दबाव बनाते हुये पंचायतों में तोड़-फोड़ करने, नगर निकाय के वार्डों में बदलाव करने, सीमावृद्धि करने और भाजपा कैसे विजयी इस आधार पर पुनर्सीमांकन करवाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अचम्भे और चिंता की बात है कि सरकार को पूरी तरह से इस अघोषित समिति ने हाईजेक कर लिया है और प्रदेशभर में पंचायती राज और नगर निकाय के अधिकारियों को इस समिति द्वारा आदेश व निर्देश वार्डों के गठन, पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन हेतु दिये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सारा कार्य गैर कानूनी है, किन्तु सीएमओ से जिला कलेक्टरों व अधिकारियों को इस समिति द्वारा दिये गये निर्देशों की पालना करने के लिये दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नगरपालिका का प्रस्ताव ईओ भेजता है किन्तु इस अघोषित भाजपा की राजनैतिक समिति द्वारा एसडीओ को दबाव में लेकर बिना ईओ की अनुशंषा के प्रस्ताव लिये जा रहे हैं तथा वार्डों की सीमावृद्धि करने, पंचायतों को तोड़ने और वार्डों बढ़ाने के निर्देश इस समिति द्वारा दिये जा रहे है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा सभी जिला कांग्रेस कमेटियों को जिला एवं संभाग प्रभारी पदाधिकारियों के माध्यम से नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के सीमांकन तथा वार्डों के पुर्नगठन हेतु नियमों की जानकारी प्रेषित की गई है तथा सभी जिला कांग्रेस कमेटियों को निर्देशित किया गया है कि अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के पुर्नगठन एवं वार्डों के सीमांकन की प्रक्रिया पर पैनी नजर रखते हुए शामिल रहे तथा नियम एवं जनभावनाओं के विरूद्ध यदि प्रक्रिया अपनायी जाये तो उसका विरोध कर पार्टी की ओर से आपत्ति प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि दिनांक 28 मार्च, 2025 को सभी प्रभारी अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में जायेंगे तथा नियम विरूद्ध हो रहे कार्यों या नियम विरूद्ध यदि कोई प्रस्ताव नगर निकायों अथवा पंचायती राज संस्थाओं द्वारा लिया गया है तो उस पर आपत्ति प्रस्तुत करने के साथ ही अपना विरोध दर्ज करवायेंगे।
डोटासरा ने कहा कि राज्य सरकार ने भरतपुर जिला परिषद् के वार्ड संख्या 8 तथा जिला प्रमुख का चुनाव स्थगित कर दिया जबकि नियम एवं कानून के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा चुनाव करवाये जाने में कोई बाधा ही नहीं है, भरतपुर जिला परिषद् का पद दिसम्बर, 2023 से रिक्त चल रहा है तथा कार्यकाल सितम्बर, 2026 तक शेष है इसी प्रकार श्रीगंगानगर जिला प्रमुख एवं जोन संख्या 16 के चुनाव नहीं करवाये जा रहे जबकि मई, 2024 से पद रिक्त है और कार्यकाल दिसम्बर, 2026 में पूर्ण होना है लेकिन चुनाव नहीं करवाये जा रहे क्योंकि दोनों ही जिला परिषद् में कांग्रेस का बहुमत है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार प्रदेश के नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं को कमजोर करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार द्वारा कांग्रेस के चुने हुये पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को निलम्बित एवं बर्खास्त नियम विरूद्ध किया जा रहा है तथा न्यायालय से सरकारी आदेश निरस्त होने के बावजूद उन्हें पुनः पद पर स्थापित नहीं किया जा रहा है।
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकाय के चुनाव नहीं करवाये जा रहे हैं, यह भारत के संविधान एवं भारतीय कानून का सीधा उल्लंघन होने के साथ ही जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्य सरकार को नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर करवाने हेतु बाध्य करने के लिये सड़क पर संघर्ष करने के साथ ही न्यायालय का द्वार खटखटा सकती है।
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