लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जानिए पूरी स्थिति
नई दिल्ली (नितिन मेहरा)। देश में हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद अब एक बार फिर ईंधन महंगा होने की आशंका जताई जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव के चलते आने वाले दिनों में कीमतों में और इजाफा हो सकता है।
हालिया बढ़ोतरी के बाद भी दबाव बरकरार
पिछले दिनों तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद कुछ शहरों में दोबारा मामूली संशोधन भी देखने को मिला।
विश्लेषकों के अनुसार, यह बढ़ोतरी कंपनियों पर पड़ रहे लागत दबाव को पूरी तरह कम करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। कई रिपोर्टों में कच्चे तेल के $100 से ऊपर बने रहने और कुछ समय के लिए $110–115 प्रति बैरल तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है।
विशेषज्ञों ने जताई और बढ़ोतरी की आशंका
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने ET Now से बातचीत में कहा कि तेल विपणन कंपनियों पर अंडर-रिकवरी का दबाव बढ़ रहा है। उनका मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियां आगे और मूल्य वृद्धि की मांग कर सकती हैं।
हालांकि, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भविष्य में कितनी बढ़ोतरी होगी, इस पर अभी सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
महंगाई पर पड़ सकता है असर
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, डीजल महंगा होने का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है। इससे खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकार और कंपनियों की नजर वैश्विक हालात पर
सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां फिलहाल वैश्विक बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात ही यह तय करेंगे कि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रहेंगी या फिर बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
