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NIA चार्जशीट में बड़ा खुलासा: दो गाइडों की खामोशी से गई 26 पर्यटकों की जान 

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 पहलगाम हमले की इनसाइड स्टोरी

पहलगाम/नई दिल्ली (नितिन मेहरा)। जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, यदि दो स्थानीय गाइड समय रहते सुरक्षाबलों को सूचना दे देते, तो 26 पर्यटकों की जान बचाई जा सकती थी।

चार्जशीट के मुताबिक, दो स्थानीय गाइडों की कथित खामोशी और आतंकियों को दी गई मदद ने इस हमले को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

हमले से एक दिन पहले रची गई साजिश

एनआईए जांच में सामने आया है कि हमले की साजिश 21 अप्रैल 2025 को तैयार की गई थी। तीन आतंकी—फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी—पहलगाम क्षेत्र में घूमते हुए स्थानीय मदद और सुरक्षित ठिकाने की तलाश कर रहे थे।

गाइडों ने दिलाई पनाह

चार्जशीट के अनुसार, स्थानीय गाइड बशीर अहमद ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने आतंकियों को देखा और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। पहले उन्हें एक पेड़ के नीचे रुकवाया गया और बाद में दूसरे गाइड परवेज की झोपड़ी में ठहराया गया। आरोप है कि बशीर ने परवेज और उसकी पत्नी को इस बारे में किसी को जानकारी न देने की हिदायत भी दी।

आतंकियों को खाना और सामान उपलब्ध कराया

जांच एजेंसी के अनुसार, 21 अप्रैल की रात आतंकियों को 10 रोटियां और सब्जी पैक कर दी गई। इसके बदले में आतंकियों ने 3000 रुपये दिए। साथ ही उन्हें खाना बनाने के बर्तन, मसाले और अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया गया, ताकि वे जंगलों में ठहर सकें।

हमले वाले दिन भी दिखे थे आतंकी

चार्जशीट में दावा किया गया है कि 22 अप्रैल को दोनों गाइड बैसरन घाटी में पर्यटकों को घुमाने गए थे। लौटते समय उन्होंने उन्हीं आतंकियों को फेंस पर बैठे देखा, लेकिन इसके बावजूद किसी सुरक्षा एजेंसी को सूचना नहीं दी। कुछ ही समय बाद बैसरन घाटी में भीषण आतंकी हमला हो गया।

NIA का दावा: जानबूझकर की गई मदद

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि दोनों गाइडों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि वे आतंकियों की मदद कर रहे हैं और यह सहायता किसी बड़ी वारदात के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस खुलासे के बाद कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय सहयोग तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क और स्थानीय समर्थन तंत्र की गहराई से पड़ताल कर रही है।

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