लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)।
जैन समुदाय के पर्युषण पर्व के अंतर्गत गुरुवार को उत्तम क्षमा धर्म की पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। उपखंड क्षेत्र के सुन्थड़ा स्थित सुखोदय तीर्थ क्षेत्र में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन विशेष आयोजन हुआ।
क्षमा धर्म का महत्व
प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर पराणा एवं मंत्री बसंत जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व जैन समाज का सबसे बड़ा महापर्व है।
इसका प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म को समर्पित होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य है—
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मन की शुद्धि: क्षमा करने से दुर्भावना और द्वेष दूर होता है।
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सामाजिक सद्भाव: क्षमा भाव से समाज में शांति और भाईचारा बढ़ता है।
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आत्मिक शक्ति: क्षमा अहंकार को कम कर व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करती है।
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सकारात्मक वातावरण: रिश्तों की दूरियाँ मिटाकर सद्भावना पैदा करती है।
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कर्मों का क्षय: क्षमा का अभ्यास अशुभ कर्मों को नष्ट करने में सहायक है।
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अहिंसा का विस्तार: “जियो और जीने दो” की भावना को मजबूत बनाती है।
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आत्म-क्षमा (त्रस क्षमा): स्वयं की गलतियों को स्वीकार कर आत्मशांति पाना।

पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम
मंदिर में सर्वप्रथम मंगलाष्टक के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद—
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नित्य अभिषेक, शांति धारा, देवशास्त्र पूजा, मूलनायक भगवान पूजा, सोलह भावना, नंदीश्वर दीप, चौबीस भगवान पूजा, दश लक्षण पूजा का आयोजन किया गया।
शाम को भक्तामर दीपार्चना का भी विशेष आयोजन हुआ, जिसकी जानकारी हुकमचंद जैन ने दी।














































