लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जिला परिषद बैठक में उठे PWD मुद्दों पर महीनों बाद भी नहीं हुई सुनवाई, आमजन में रोष
रिपोर्ट: तुषार पुरोहित, सिरोही
सिरोही। सिरोही जिले में सड़क व्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी खुलकर सामने आई है। भाजपा सरकार में भाजपा के ही जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। जिला परिषद सदस्य दिलीप जैन द्वारा सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े मुद्दे उठाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया गया कि 29 अक्टूबर 2025 को आयोजित जिला परिषद की बैठक में जनहित को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सड़क सुधार प्रस्ताव रखे गए थे। इन प्रस्तावों को कलेक्टर के माध्यम से संबंधित विभागीय अधिकारियों तक भेजा गया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। मामले को गंभीर मानते हुए जैन ने इसकी शिकायत उच्च स्तर पर मंत्री को भी भेज दी है।

बदहाल सड़कों से बढ़ा खतरा
क्षेत्र की कई सड़कें लंबे समय से जर्जर अवस्था में हैं।
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नांदिया से आरासणा रोड की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। यह सड़क गारंटी अवधि (Defect Liability Period) के आसपास ही क्षतिग्रस्त हो गई थी। पांच वर्षों से मरम्मत नहीं होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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कोजरा गांव से कोजरा चौराहा (NH) मार्ग पर गहरे गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
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नांदिया गांव का आंतरिक मार्ग—जैन मंदिर से प्राथमिक बालिका विद्यालय तक—वर्षों से मरम्मत की प्रतीक्षा में है। स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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नांदिया जनापुर रपट का समतलीकरण सही नहीं होने से यह स्थान ब्लैक स्पॉट बन चुका है, जहां वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नियमों की अनदेखी का आरोप
राजस्थान रोड डेवलपमेंट पॉलिसी और PWD मैनुअल के तहत सड़क सुरक्षा और नियमित रखरखाव अनिवार्य है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पारित प्रस्तावों की अनदेखी करना सेवा गारंटी अधिनियम की भावना के विपरीत है।
जिला परिषद सदस्य दिलीप जैन ने बैठक में कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं होगी तो आमजन की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तकनीकी जांच करवाकर शीघ्र मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है।
गुड गवर्नेंस पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने “गुड गवर्नेंस” के दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधियों को ही सुनवाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा—यह बड़ा सवाल बन गया है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाए और प्रस्ताव पारित होने के बाद भी कार्य लंबित रखने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करते हैं।