लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जिला साहित्यकार परिषद् की काव्य गोष्ठी सम्पन्न
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। जिला साहित्यकार परिषद् द्वारा स्थानीय हेमू कालानी विद्यालय परिसर, सिन्धु नगर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कवियों ने विविध विषयों पर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई।
गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं ने श्रोताओं को गहन रूप से प्रभावित किया।
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रतन कुमार चटुल ने नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा – “आज़ादी की छूट देखो, नेताआंे की फूट देखो।”
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बंशीलाल पारस ने हिंदी भाषा पर गर्व व्यक्त किया – “एक अकेली नहीं है हिंदी, इसका सारा हिंदुस्तान है।”
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ओम उज्जवल ने मातृभाषा हिंदी की महिमा गाते हुए कहा – “राजभाषा हिंदी, मेरी मातृभाषा हिंदी, हिंदी ही तो मेरे राष्ट्र की शान है।”
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प्रेम सोनी ने प्रस्तुत किया – “मैं कठपुतली, तुम कठपुतली, कौन नचाता देखो।”
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बृज सुंदर सोनी ने भावुकता से कहा – “पिता की डांट से मां की लोरी तक।”
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देवी लाल दुलारा ने कहा – “मां-बाप नहीं वे तो भगवान हमारे हैं।”
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अजीज जख्मी ने प्रेमाभिव्यक्ति की पंक्तियां सुनाईं – “आज भी मुझको प्रतीक्षा है तेरे अभिसार की।”
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जयप्रकाश भाटिया की जोशीली पंक्ति “श्वानो के झुंड ने आज फिर शेरों को ललकारा है” पर खूब तालियां बजीं।
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दयाराम मेठानी ने प्रेरणादायी कविता सुनाई – “बोझ अपनी जिंदगी का खुद उठाना आ गया, हौंसलों से हर मुसीबत को मिटाना आ गया।”
कार्यक्रम में गोपाल शर्मा, नरेन्द्र वर्मा, शिखा बाहेती, चिरंजीलाल टांक और श्यामसुंदर तिवारी ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
गोष्ठी का माहौल साहित्य, हास्य, श्रृंगार और जीवन दर्शन की रंगीन छटा से सराबोर रहा।
