लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा (दुर्योधन मयंक)। उपखंड क्षेत्र के श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में श्री अष्टान्हिका महापर्व का पंचम दिवस बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। प्रबंध समिति के महावीर प्रसाद पराणा और बाबूलाल कासलीवाल ने बताया कि जैन धर्माचार्यों के अनुसार अष्टान्हिका पर्व के दौरान देवलोकों के देवगण दिव्य नन्दीश्वर द्वीप के जिनालयों में जाकर चौबीस तीर्थंकरों की भव्य पूजा-अर्चना करते हैं।
जैन शास्त्रों के अनुसार नन्दीश्वर द्वीप मानव लोक से परे स्थित एक पवित्र दिव्य क्षेत्र है, जहाँ अनादि काल से जिनबिंब विराजमान हैं और केवल देव ही वहाँ प्रत्यक्ष पूजा कर सकते हैं। इसी भावना से प्रेरित होकर पृथ्वी लोक के श्रद्धालु भी आठ दिनों के इस पर्व में नन्दीश्वर द्वीप की प्रतीकात्मक आराधना करते हैं।
जिनालयों में नन्दीश्वर विधान, सिद्धचक्र पूजन, विशेष अभिषेक, शांतिधारा और सामूहिक नवकार मंत्र जाप का आयोजन किया गया। विद्वानों ने बताया कि अष्टान्हिका केवल बाह्य उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्मा को सिद्ध पद की ओर उन्मुख करने का साधना पर्व है। इस अवसर पर श्रद्धालु “णमो सिद्धाणं” का जाप कर सिद्ध परमात्मा के अनंत ज्ञान, दर्शन और सुख का स्मरण करते हैं तथा अपने भीतर के राग-द्वेष को शांत करने का संकल्प लेते हैं।
कार्यक्रम में शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में मंगलाष्टक कर नित्य अभिषेक और शांति धारा का आयोजन हुआ। वार्षिक शांतिधारा में रमेशचंद, रौनक सर्राफ, पांडुशिला, कमल कुमार, बाबूलाल, मुकेश कुमार ने भाग लिया। इसके बाद देव शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान की मूलनायक भगवान की पूजा, पंचमेरु एवं नन्दीश्वर द्वीप की पूजा कर सिद्धों की आराधना के साथ महापर्व का पंचम दिवस संपन्न किया गया।
सांय 6:30 बजे भक्तामर मंडल उनियारा द्वारा भक्तामर दीपार्चना सानंद संपन्न कर कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर भक्तामर संयोजक हुक्म चंद एवं नरेंद्र जैन बनेठा ने सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया।


















































