लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर। जयपुर के अराध्यदेव श्रीगोविंददेव जी मंदिर में प्रवेश को लेकर मंदिर प्रशासन ने जिला प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार भक्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ बदलाव किए हैं। व्यवस्था में बदलाव समय की मांग के अनुसार होता रहता है। पूर्व में जो दर्शनों के लिए व्यवस्था थी उस समय के अनुसार की गई थी। लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह प्रसिद्द मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर भीड़ के कारण हादसे हुए हैं, उनसे सबक लेते हुए ही प्रशासन ने सोच- समझकर श्रीगोविंद देव जी के दर्शनों के लिए कुछ बदलाव किए हैं। इस तरह से दर्शनों की व्यवस्था श्री खाटू श्याम जी, बांके बिहारी, सांवरिया सेठ के मंदिरों में इस तरह की व्यवस्था की गई है।
श्रीगोविंद देव जी मंदिर में दर्शनों के लिए की गई व्यवस्था को लेकर यहां के श्रद्दालु अलग- अलग धड़ों में बंट गए है। कुछ लोग इनको अंदरखाने भड़का भी रहे हैं। कई लोग इस आड़ में राजनीति भी कर रहे हैं। हालांकि इस तरह की व्यवस्थाएं समय के अनुसार बदलती रहती है। ऐसा नहीं है की जो वर्तमान में व्यवस्था की गई है वदली नहीं जा सकेगी। यदि प्रशासन को लगेगा की इससे अव्यवस्था होगी तो इसे फिर से बदला जा सकता है। लेकिन कुछ लोग इस पर राजनीति कर रहे हैं जो सरासर गलत है।
व्यवस्था का विरोध इसलिए
श्रद्दालुओं का कहना है की इस व्यवस्था से उनकी और श्रीगोविंद देव जी के विग्रह के बीच – 20- 25 फीट की दूरी हो गई।ृ कई लोगों का कहना है की अब कुछ क्षणों के लिए ही गोविंद देवजी के दर्शन होते है। पहले जितना समय चाहो उन्हें निहार सकते थे। गाड़ियों की पार्किंग और एकादशी और रविवार को शहर के लोग ज्यादा आते है । अब भगवान के मंदिर बैठकर प्रार्थना नहीं कर सकेंगे। वर्षों से चल रही व्यवस्था में भगवान श्रद्दालु मंदिर में बैठकर भजन कीर्तन करते थे अब यह व्यवस्था खत्म सी हो गई है। जिससे लोग ज्यादा विरोध कर रहे हैं। श्रद्दालुओं का कहना है की प्रशासन को इस पर व्यवस्था फिर से विचार करना चाहिए।
नई व्यवस्था इसलिए लागू करनी पड़ी क्योंकी
पिछले कुछ दिनों से मंदिर में जो व्यवस्था बदली गई है, उसके पीछे भी कई वजहें हैं।
हम सब सोचते हैं कि प्रशासन ने ऐसा क्यों किया, लेकिन कभी सोचा है कि मजबूरी क्यों आई?
मंदिर के बाहर गाड़ियों की अव्यवस्था –
लोग अपनी गाड़ियां कहीं भी, जैसे-तैसे पार्क कर देते हैं। दूसरों की गाड़ी ब्लॉक कर देते हैं, जिससे कई बार घंटों तक किसी को परेशानी होती है।
जूते-चप्पल उतारने की लापरवाही –
जहां जूते-चप्पल उतारने की जगह है, वहां नहीं उतारते। मंदिर के छावन के प्रवेश तक चप्पलें उतारकर रखते हैं, जिससे आने-जाने वालों को दिक्कत होती है और वातावरण की पवित्रता भी बाधित होती है।
दर्शन स्थल पर रुकावट –
दर्शन करके लोग वहीं खड़े रह जाते हैं, पीछे आने वाले भक्तों का ध्यान नहीं रखते। इससे न तो वे स्वयं ठीक से दर्शन कर पाते हैं, न दूसरों को करने देते हैं।
अव्यवस्थित प्रणाम –
दंडवत प्रणाम करना श्रद्धा का प्रतीक है, लेकिन सोचिए – बीच रास्ते में, जहां लोग आ-जा रहे हैं, वहां लेट जाने से दूसरों को कितनी परेशानी होती होगी?
दीपक रखने की अव्यवस्था –
दीपक रखने का स्टैंड होने के बावजूद लोग दीपक कहीं भी रखकर चले जाते हैं। जरा सोचिए, यह कितनी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
महिलाओं-पुरुषों की व्यवस्था का उल्लंघन –
जहां पुरुष खड़े होते हैं, वहां महिलाएं घुसती हैं, और जहां महिलाएं खड़ी होती हैं, वहां पुरुष घुस जाते हैं। यह भी एक बड़ी अव्यवस्था और असुविधा का कारण बनता है।
फोटो खिंचवाना और भीड़ जमाना –
भक्त रेलिंग के पास या कहीं भी समूह बनाकर फोटो खिंचवाने लग जाते हैं। हटने को कहने पर बहस, झगड़ा, यहां तक कि मारपीट तक की नौबत आ जाती है। क्या भगवान ऐसे व्यवहार से प्रसन्न होंगे?
बांके बिहारी मंदिर, खाटूश्याम जी, सांवरिया सेठ एवं अन्य बड़े मंदिरों में अत्यधिक भीड़ की व्यवस्था नहीं होने के कारण भगदड़ मची, जिससे कई भक्तों की जान चली गई और अनेक घायल हो गए।
ऐसी परिस्थिति यहां उत्पन्न न हो, इसी कारण मंदिर प्रशासन ने यह व्यवस्था की है। मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्दालुओं से सहयोग की अपील की है। जिससे व्यवस्था को सुचारु रुप से चलाया जा सके। मंदिर प्रशासन का कहना है की यदि ये व्यवस्था कारगर साबित नहीं होगी इसमें बदलाव को लेकर फिर से विचार किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल तो सबको सहयोग करने की जरुरत है।










































