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मां कूष्मांडा की आराधना से सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना, श्रद्धालुओं में उत्साह
धर्म डेस्क। (रितु मेहरा) शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। भक्त माता की आराधना कर सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। उनकी आराधना से जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और आत्मविश्वास प्राप्त होने की मान्यता है।
ऐसे करें मां कूष्मांडा की पूजा
नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर मां दुर्गा के स्वरूप मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को पुष्प, फल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद मां के मंत्रों का जाप कर सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
मां कूष्मांडा का मंत्र है—
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ माता की पूजा करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है।
मंदिरों में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व
नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और आरती जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए माता के दर्शन करते हैं।
नवरात्रि का यह पर्व शक्ति, भक्ति और सकारात्मकता का संदेश देता है। मां कूष्मांडा की आराधना के साथ श्रद्धालु जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
