लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
डग (झालावाड़) | सुनील निगम
87 वर्षीय विष्णु गोपाल काका की 23 वर्षों की निस्वार्थ सेवा बनी मिसाल
झालावाड़| झालावाड़ जिले के डग नगर की हर सुबह इंसानियत, सेवा और समर्पण की एक प्रेरक कहानी कहती है। यह कहानी है 87 वर्षीय विष्णु गोपाल अग्रवाल, जिन्हें पूरा नगर स्नेह से “काका” या “नेताजी” कहकर पुकारता है। उम्र भले ही ढलान पर हो, लेकिन सेवा का उनका जज़्बा आज भी उतना ही जवान है।
साल 2002 से अब तक लगातार 23 वर्षों से काका रोज़ सुबह अस्पताल पहुँचकर मरीजों को चाय पिलाते हैं, उनका हाल-चाल पूछते हैं और उन्हें अपनत्व का एहसास कराते हैं। उनके लिए यह केवल चाय नहीं, बल्कि उम्मीद, संवेदना और मानवता का संदेश है।
अस्पताल में मिली प्रेरणा, सेवा बना जीवन का लक्ष्य
विष्णु गोपाल काका बताते हैं कि जब एक बार उनका पैर फ्रैक्चर हो गया था और वे झालावाड़ अस्पताल में भर्ती थे, तभी उन्हें समाजसेवी खंडेलवाल जी से प्रेरणा मिली। उसी समय उन्होंने संकल्प लिया कि वे भी ऐसा कार्य करेंगे जो जरूरतमंदों के काम आए।
काका कहते हैं—
“सेवा करने का जज़्बा कभी वृद्ध नहीं होता। हर व्यक्ति को निष्काम भाव से सेवा करते रहना चाहिए।”
साइकिल, चाय की केतली और इंसानियत का सफर
काका का जन्म लुहारिया ग्राम पंचायत के छोटे से गांव नंदपुर में हुआ था। पोतों की पढ़ाई के लिए वे डग आ गए और यहीं के होकर रह गए।
आज भी उनकी दिनचर्या अनुकरणीय है—
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रोज़ शाम अस्पताल जाकर यह जानकारी लेना कि कितने मरीज भर्ती हैं
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सुबह तड़के उठकर उसी अनुसार चाय तैयार करना
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साइकिल पर चाय की केतली बाँधकर अस्पताल पहुँचना
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रास्ते में श्वानों के लिए रोटियां ले जाना और उन्हें खिलाते हुए आगे बढ़ना

समाज के लिए प्रेरणा
डग नगर के ये “काका” यह सिखाते हैं कि सेवा के लिए उम्र नहीं, बस एक नेक दिल चाहिए। उनकी निस्वार्थ सेवा आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
विष्णु गोपाल काका आज केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि
इंसानियत की जीती-जागती मिसाल हैं।


















































