Home Chhattisgarh *सावन और भारतीय त्योहारों की परंपरा*

*सावन और भारतीय त्योहारों की परंपरा*

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सावन महीना व्रत त्यौहार पूजा का विशेष अवसर

भारतीय संस्कृति में ऋतुओं का गहरा महत्व है, और उनमें भी सावन का महीना विशेष स्थान रखता है। सावन, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वर्षा ऋतु में आता है। यह महीना केवल हरियाली और वर्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, प्रेम, और उल्लास का महीना भी है। भारतीय त्योहारों की परंपरा में सावन का एक अद्भुत योगदान है।

सावन का प्राकृतिक सौंदर्य और महत्व

साव का आगमन होते ही प्रकृति जैसे नई ज़िंदगी से भर जाती है। सूखी धरती पर जब पहली फुहार गिरती है, तो वातावरण में एक सजीवता फैल जाती है। खेतों में हरियाली छा जाती है, नदियाँ बहने लगती हैं और पेड़ों पर झूले पड़ जाते हैं। यही मौसम त्योहारों, मेलों और धार्मिक आयोजनों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

 

भगवान शिव की भक्ति और सावन

श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय मास कहा गया है। इस महीने में श्रद्धालु श्रावण सोमवार का व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। विशेष रूप से कांवड़ यात्रा के माध्यम से हजारों शिवभक्त गंगा जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। यह परंपरा आस्था, संयम और भक्ति का प्रतीक है।


महिलाओं के पर्व: हरियाली तीज और झूला

सावन का महीना महिलाओं के लिए भी बहुत खास होता है। इस समय हरियाली तीज, कजरी तीज, और हरियाली अमावस्या जैसे पर्व मनाए जाते हैं। विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं और नवविवाहिताएं मायके जाकर झूले झूलती हैं, गीत गाती हैं और मेहंदी लगाती हैं। लोकगीतों की मधुर ध्वनि और झूलों की सरसराहट सावन के सौंदर्य को और भी बढ़ा देती है।

रक्षा बंधन: भाई-बहन के रिश्ते का पर्व

सावन के अंतिम दिनों में आने वाला रक्षा बंधन भी एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और भाई उन्हें जीवन भर रक्षा का वचन देते हैं। यह परंपरा भावनात्मक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोण से बहुत महत्व रखती है।

भक्ति और लोक परंपराओं का संगम

सावन के महीने में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की लोक परंपराएं देखने को मिलती हैं। कजरी गीत, झूला गीत, और भक्ति भजन वातावरण को आध्यात्मिक और आनंदमय बना देते हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, सावन का उत्सव विभिन्न रूपों में मनाया जाता है।

सावन केवल एक मौसम नहीं है, यह एक भावना, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। यह महीना न केवल प्रकृति को जीवन देता है, बल्कि लोगों के रिश्तों, आस्था और परंपराओं को भी सजीव करता है। भारतीय त्योहारों की परंपरा में सावन का योगदान अमूल्य है – यह हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमें मिल-जुलकर जीने की प्रेरणा देता है।


अनिल माथुर
जोधपुर (राजस्थान)

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