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संस्कृत विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

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जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर, श्री अरविंद सोसाइटी एवं साक्षी ट्रस्ट बेंगलुरु के संयुक्त तत्वावधान में लिविंग वेद श्रीअरविंद के आलोक में वेद की आधुनिक व्याख्या विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शनिवार को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर प्रांगण के सभागार में शुरू हुआ। मुख्य अतिथ राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी ने दीप प्रज्जवलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। देवनानी ने इस मौके पर कहा कि वेद आज भी उतने ही प्रासंगिक और सामयिक है जितने प्राचीनकाल में थे। वेद वाणी से नहीं ह्दय से पढ़े जाते हैं। ये केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं अपितु ज्ञान के शिखर है। जीवन का उद्देश्य वेदों से ज्ञात होता है। वेद हमें कर्म के लिए प्रेरित करते हैं। वेद हमारा अतीत ही नहीं वर्तमान भी है। वेद पूर्णता का रोडमैप भी तैयार करते हैं। आम जन को वेदों की अनुभूति करवाना विद्वानों का कत्र्तव्य होना चाहिए। वेद आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। महर्षि अरविंद और स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों को जन जन तक पहुंचाने का अनुकरणीय कार्य किया। इस मौके पर देवनानी ने चार पुस्तकों का विमोचन भी किया।
वायु सेना में विंग कमांडर रहे डॉ. आलोक पांडे ने वेद के ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में जोड़ते हुए सारगर्भित उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि वेद शास्वत है, अंतिम वेद अभी लिखा जाना शेष है। वेद ज्ञान का पर्याय है। ज्ञान वही प्राप्त कर सकता है जिसके अंदर जिज्ञासा है। उन्होंने कहा कि इंद्र और वायु से प्रेरणा लेकर जीवन का लक्ष्य तय करना चाहिए।
प्रारंभ में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर कैंपस के निदेशक डॉ. सुदेश शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि वेद ज्ञान और कर्म दोनों का आधार है। वेद की ओर लौटना और वेदों को पढऩा अलग बात है, लेकिन आज वेदों को जीने की आवश्यक्ता है। साक्षी ट्रस्ट बेंगलुरु के अध्यक्ष डॉ. आर वि जहागीरदार ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। प्रो सुदर्शन शर्मा, प्रो अनुराधा चौधरी, प्रो अभिराज राजेंद्र मिश्र, प्रो मकरंद आर. परांजपे, प्रो नरेंद्र अवस्थी जैसे प्रतिष्ठित विद्वानों ने श्रीअरविंद के जीवन दर्शन से संबंधित सिद्धांतों पर मौलिक उद्बोधन देकर तालियां बटोरी।

*वैदिक साहित्य अध्यात्म का आधार:*
IKS की राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर prof अनुराधा चौधरी ने कहा कि आधुनिक दौर में वैदिक साहित्य भारतीय संस्कृति का और अध्यात्म का मूल आधार है, उसे पुन: खोजा जाना चाहिए। वैदिक ग्रंथों में जीवन के आध्यात्मिक, दार्शनिक और नैतिक पहलुओं को प्रेरित किया गया है। श्रीअरविंद ने वैदिक साहित्य को केवल प्राचीन ग्रंथ के रूप में नहीं बल्कि एक गहन प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में देखा। उन्होंने अपनी पुस्तक द सीक्रेट ऑफ द वेदाज में वेदों की व्याख्या को नई दृष्टि प्रदान की। उनके अनुसार वेद केवल बाहरी अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं बल्कि वह मानव चेतना के विकास के साधन हैं। श्रीअरविंद ने वेदों को व्यावहारिक धरातल पर प्रस्तुत किया। उन्होंने वैदिक देवताओं को मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियों के प्रतीक के रूप में परिभाषित किया।
साक्षी ट्रस्ट बेंगलुरु के अध्यक्ष प्रो आर. वी. जहागीरदार ने आगंतुक विद्वानों का धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो. रेणुका राठौड़ ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर की मीडिया प्रभारी डॉ. रानी दाधीच ने बताया कि सम्मेलन में करीब 200 विद्वान की उपस्थित रहे। इस मौके पर श्रीअरविंद के साहित्य की पुस्तकों का वितरण भी करवाया गया।
विद्वानों के अतिरिक्त अरविंद के अनुयायी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

*आज ये विद्वान देंगे व्याख्यान:*
रविवार को अखिलेश मिश्रा(आयरलैंड में भारतीय राजदूत), डॉ. आर नारायणस्वामी,  परीक्षित सिंह विभिन्न विषयों पर अपने विचारों से लाभान्वित करेंगे। आलोक पांडेय, डॉ. आर वी जहगिरदर, प्रो रेणुका राठौड़, सुश्रुत बाढ़े, प्रो राजेन्द्र प्रसाद शर्मा, पुट्टू कुलकर्णी, डॉ. रानी दाधीच, डॉ. डम्बरूधर पति, डॉ. योगेश वल्कर, स्वामी ज्ञानेश्वरपुरी, प्रो बीना अग्रवाल, डॉ डी दयानाथ, मनीषा गुप्ता मौलिक विचारों शोध पत्र के रूप प्रस्तुत करेंगे।

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