लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
लंदन में रामलीला मंचन देखकर अभिभूत हुए स्पीकर देवनानी, कहा – “रामायण मानवता का दिशा सूत्र”
अजमेर से संवाददाता : नितिन मेहरा
अजमेर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ही विश्व कल्याण का आधार है। रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि यह मानव जीवन के आदर्शों, मर्यादाओं और कर्तव्यपालन का विज्ञान है, जो पूरी दुनिया को शांति और मानवता का मार्ग दिखा सकता है।
श्री देवनानी ने यह विचार लंदन में आयोजित भव्य रामलीला मंचन के अवसर पर व्यक्त किए। यह कार्यक्रम ओवरसीज फ्रेंड्स द्वारा साउथ लंदन में आयोजित किया गया था।
“विदेश में रामलीला देखना भावनात्मक अनुभव”
रामलीला मंचन देखकर अभिभूत हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विदेश भूमि पर भारतीय संस्कृति का यह जीवंत प्रदर्शन अत्यंत प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा –
“यह देखकर गर्व होता है कि हमारे प्रवासी भारतीय न केवल अपनी संस्कृति को संजोए हुए हैं, बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य भी कर रहे हैं।”
उन्होंने आयोजकों और भारतीय समुदाय को धन्यवाद देते हुए कहा कि रामलीला भारतीय सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जो सत्य, मर्यादा और मानवता के आदर्शों को विश्व में प्रसारित करती है।
“रामायण जीवन का विज्ञान है”
वासुदेव देवनानी ने कहा कि रामायण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के लिए मार्गदर्शक है। इसमें वर्णित पिता-पुत्र, पति-पत्नी और भाई-भाई के संबंध आज भी जीवन के सर्वोच्च आदर्श हैं।
उन्होंने सभी भारतीयों से आग्रह किया कि –
“हर व्यक्ति को रामायण अवश्य पढ़नी चाहिए। यह मनुष्य को मानवीय बनाती है, अहंकार को समाप्त करती है और समाज में प्रेम, कर्तव्य और मर्यादा की भावना जगाती है।”
“भारतीय संस्कृति की जड़ें सीमाओं से परे”
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लंदन जैसे शहर में रामलीला का मंचन होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें भौगोलिक सीमाओं से परे हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और विश्व को यह संदेश देते हैं कि सांस्कृतिक चेतना ही वैश्विक सौहार्द का आधार है।
“वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से विश्व में शांति संभव”
देवनानी ने कहा कि सनातन संस्कृति की आत्मा “वसुधैव कुटुंबकम्” के भाव में निहित है। जब यह भावना जागृत होती है, तब युद्ध, हिंसा और विभाजन स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज जब विश्व भौतिकता और तनाव से ग्रस्त है, तब भारत की संस्कृति ही वैश्विक संतुलन और नवचेतना का माध्यम बन सकती है।
“रामायण अध्ययन से समाप्त होता है अहंकार”
देवनानी ने कहा कि जब व्यक्ति रामायण के आदर्शों को जीवन में उतारता है, तब उसके भीतर से अहंकार, हिंसा और स्वार्थ समाप्त हो जाते हैं।
सनातन संस्कृति जीवन जीने की कला है, जो मनुष्य को आत्मनिष्ठ और परोपकारी बनाती है।
इस अवसर पर कुलदीप शेखावत, प्रवीण कुमार, हरेंद्र गोधा सहित बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय उपस्थित रहे।











































