सहकारिता का मंत्र एक सबके लिए- सब एक के लिए- पूनिया

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आजादी के बाद देश में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन 

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

गृहमंत्री अमित शाह को सहकारिता मंत्रालय का प्रभार देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसानों-गांवों के उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता को साबित करता है; डॉ. पूनियां

सहकारिता का मंत्र एक सबके लिए- सब एक के लिए; मैं जब छोटा था तब देखता था कि गांव में बेटी की शादी पूरा गांव मिलकर कर देता था

जयपुर। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अवसर पर जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र के आमेर विधानसभा के जालसू में आयोजित सम्मान समारोह में भाजपा हरियाणा संगठन प्रभारी, भाजपा राजस्थान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने संबोधित करते हुये कहा कि सहकारिता आंदोलन भारत के ग्रामीण जीवन की प्रगति का महत्वपूर्ण कारक है, देश की आजादी के बाद भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पहली बार सहकारिता मंत्रालय का गठन किया और सहकारिता मंत्रालय का देश के बहुत ही काबिल व्यक्ति गृहमंत्री अमित शाह को प्रभार देना यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसानों एवं गांवों के उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता को साबित करता है।

डॉ. पूनियां ने कहा कि सहकारिता का मंत्र है एक सबके लिए-सब एक के लिए, यह मंत्र केवल आधुनिक युग के लिए ही नहीं, हमारी जो पुरातन व्यवस्था है, जब हम लोग गणतंत्र थे तो हम आपस में मिल-जुलकर जो हमारी समाज व्यवस्था थी, हमारे ग्राम व्यवस्था थी, उसमें हम व्यवस्थित तरीके से काम कर लेते थे।

एक सबके लिए सब एक के लिए की भावना

उन्होंने कहा कि आजकल तो जमाना बदल गया जब मैं छोटा था तब देखता था, जब गांव में बेटी की शादी होती थी तो पूरा गांव मिलकर बेटी की शादी कर देता था, मिलकर संसाधन जुटाने से लेकर शादी करने तक की जिम्मेदारी पूरा गांव भाईचारे के साथ करता था, पहले कहीं लावणी भी करनी पड़ती थी तो लोग पड़ोसी की मदद कर देते थे।

सहकारिता का मंत्र हिंदुस्तान की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है, यह अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष है, भारत की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में कई बार अभिनव प्रयोग किये, उस प्रयोग में आजादी के बाद देश में पहली बार अलग से सहकारिता मंत्रालय का गठन करना और मोदी सरकार के बहुत ही काबिल मंत्री गृहमंत्री अमित शाह को सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी देना, बहुत ही दूरदर्शी निर्णय है।

अमित शाह ने यह पहल की की हमारी जितनी भी सहकारी संस्थाएं हैं, ग्राम सेवा सहकारी संस्था से लेकर ऊपर तक की संस्थाओं को मजबूत और पारदर्शी बनाने का काम किया।

सहकारी संस्थाओं का इस तरीके से ताना बाना है कि छोटे से गांव ढाणी तक भी लोगों को इससे ताकत मिलती है, गांव में बैठे लोग छोटी-छोटी जरूरतों को भी सहकारी संस्थाओं के माध्यम से पूरा कर लेते हैं।

राजस्थान में भी राजीविका के जरिए बदलाव आया, जितने भी लोगों को सहकारिता का पुरस्कार दिया गया, सहकारिता के प्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामना देता हूं कि सहकारिता के इस आंदोलन को निरंतरता के साथ आगे बढ़ाया।

सहकारिता के इस क्षेत्र में अलग-अलग संभावनाएं हैं, आज राजस्थान की सरस डेयरी हिंदुस्तान की गिनी चुनी प्रमुख डेयरियों में आती है, इसमें इतनी अच्छी सहूलियत है, इतना बढ़िया नेटवर्क है कि लोग अपने परिवार का पोषण अच्छे से करते हैं, आप सबसे अपील करता हूं कि सहकारिता को मजबूती देने के लिए बढ़-चढ़कर आगे आयें।

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