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सच्चे ईश्वर की शरण से जीवन का बेड़ा पार संभव : संत ग्यारसीलाल

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

माण्डलगढ़। उपखंड मुख्यालय पर जेल के पीछे स्थित निरंकारी कॉलोनी में रात्रि को विशेष सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम भीलवाड़ा के ब्रह्मज्ञानी एवं ज्ञान प्रचारक महात्मा ग्यारसीलाल के सानिध्य में संपन्न हुआ।

संत ग्यारसीलाल ने सत्संग में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चे प्रभु परमात्मा, जो निरंकार रूप में सर्वत्र विद्यमान हैं, उनकी प्राप्ति पूर्ण सत्गुरु की शरण में जाकर ही संभव है। सत्गुरु के माध्यम से प्रभु के साक्षात दर्शन किए जा सकते हैं और जीवन रूपी नैया को पार लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा, सत्संग और सिमरण की नाव के सहारे जीवन को आनंदमय बनाया जा सकता है।

गुरु महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सत्गुरु वह है जो सत्य का बोध कराकर तत्वज्ञान प्रदान करता है तथा मन के सभी भ्रमों को दूर करता है। सत्गुरु न केवल सही मार्ग दिखाता है, बल्कि भटकी हुई आत्मा को मंजिल तक पहुंचाने का कार्य भी करता है। उनके अनुसार सद्गुरु सर्वसमर्थ होता है और उसके समान कोई दूसरा दाता नहीं।

संत ने समझाया कि जब भक्त सत्गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर उसी मार्ग पर चलता है, तभी जीवन की उलझनें दूर होती हैं। प्रभु की असीम शक्ति से जुड़ने पर भक्त के जीवन में विनम्रता, विशालता और प्रेम की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति का प्रभाव व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज पर सकारात्मक पड़ता है।

सत्संग आयोजक राधेश्याम महात्मा एवं राजकुमार महात्मा सहित उनके परिजनों ने भीलवाड़ा से पधारे संत ग्यारसीलाल का राजस्थानी पगड़ी, दुपट्टा और मालाएं पहनाकर स्वागत-सम्मान किया।

कार्यक्रम में मांडलगढ़ ब्रांच मुखी महात्मा दुर्गालाल, आसींद ब्रांच मुखी गंगापाल, संगत इंचार्ज रामप्रसाद काछोला, ज्ञान प्रचारक जितेन्द्र सिंह, मुकेश महात्मा, पप्पू जी महात्मा (बीगोद), हरिओम आमेटा (फलासिया), बालकिशन महात्मा, रतनलाल महात्मा, अनिल महात्मा सहित अन्य संतों ने गीत, भजन एवं विचार प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

सत्संग में बीगोद, माण्डलगढ़, सोपुरा, नन्दराय, बोरखेड़ा, कोटड़ी, पीपल्दा, काछोला, मुणपुरा सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक भाव से सराबोर रहा।

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