लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
नावा (डीडवाना-कुचामन)।
प्रसिद्ध सांभर झील एक बार फिर विदेशी प्रवासी पक्षियों की मौत को लेकर सुर्खियों में है। झील क्षेत्र में घायल और मृत पक्षियों के शव मिलने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने 2019 की बड़ी पक्षी त्रासदी की याद ताज़ा कर दी है, जब हजारों प्रवासी पक्षियों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
मिली जानकारी के अनुसार, स्थानीय टीमों ने झील का दौरा कर कई घायल और मृत विदेशी पक्षी देखे हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि झील का पानी रासायनिक प्रदूषण की चपेट में है। बताया जा रहा है कि नावा क्षेत्र की कुछ नमक रिफाइनरियों से निकलने वाला अपशिष्ट (वेस्ट) झील किनारे फेंका जा रहा है, जिससे जहरीले केमिकल झील के पानी में मिलकर पक्षियों के लिए घातक बन रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने शुक्रवार को आपातकालीन बैठक बुलाई है, जिसमें वन विभाग, पशुपालन विभाग, रिफाइनरी प्रबंधन और पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
वहीं जयपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम आज नावा पहुंचकर पक्षियों के रेस्क्यू और जांच कार्य शुरू करेगी। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इन पक्षियों की मौत का कारण एवियन बोटूलिज्म (Avian Botulism) नामक बैक्टीरिया बताया जा रहा है — यही बीमारी कुछ वर्ष पहले भी करीब 30,000 प्रवासी पक्षियों की मौत का कारण बनी थी।
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण के स्रोतों पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो सांभर झील फिर से पक्षियों की कब्रगाह बन सकती है।


















































