लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
भरतपुर से राजेंद्र शर्मा जती की रिपोर्ट
RBM अस्पताल के बेड से मरीज 4 घंटे गायब , नर्सिंगकर्मी और स्टाफ ने नहीं दिया ध्यान, परिजन नहीं थे मौके पर।
परिवार की अनदेखी और लापरवाही भी आई सामने
भरतपुर। मेडिकल वार्ड के बाथरूम में एक मरीज का शव पड़ा हुआ मिला। मृतक को सांस लेने में दिक्कत थी। इसलिए उसे एडमिट किया गया था। मरीज खुद बाथरूम में गया जिसके बाद उसकी तबियत ख़राब हुई और फिसल कर वह फर्श पर गिर गया। जब मरीज के परिजन अस्पताल पहुंचे तो, उन्होंने मरीज को ढूंढा। बाथरूम में देखा तो, वह अंदर से बंद था। जिसके बाद कुण्डी तोड़कर नर्सिंगकर्मी और मृतक के परिजन अंदर गए तो, वहां मरीज का शव पड़ा हुआ था।
पत्नी और बेटा चीख चीख कर पूछ रहे हैं प्रशासन से सवाल क्या लौटाएंगे वे उसके पिता को!
मृतक के बेटे शिवान (29) निवासी नदिया मोहल्ला ने बताया कि 12 मई को उसके पिता बुद्धिराम (62) को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी साथ ही पेट दर्द भी था। जिसके बाद उन्हें 12 मई को ही आरबीएम अस्पताल में भर्ती किया गया। बुद्धिराम के परिजन दिन में उन्हें अस्पताल में छोड़कर घर आ जाते और शाम के समय में दोबारा अस्पताल चले जाते।
चलते फिरते थे इसीलिए परिजन घर चले गए, पीछे से हुआ हादसा
बुद्धिराम खुद से चल फिर रहे थे। इसलिए वहां पर किसी के रहने की जरुरत नहीं होती थी।
शिवान ने बताया कि कल करीब 2 बजे पिता को अस्पताल में छोड़कर घर आ गए थे। शाम 5 बजे बुद्धिराम का बड़ा बेटा अस्पताल पहुंचा। बेड पर बुद्धिराम मौजूद नहीं थे। नरेश ने अपने पिता को अस्पताल में सभी जगह देखा। जब वह नहीं मिले तो, उसने मेडिकल वार्ड में स्थित नर्सिंग कर्मियों को इसके बारे में बताया साथ अपने परिजनों को घटना की सूचना दी। बुद्धिराम के परिजन अस्पताल पहुंचे और सभी मिलकर बुद्धिराम को ढूंढते रहे।
अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ की होती है?
करीब 4 घंटे ढूंढने के बाद भी उनका कुछ पता नहीं लगा। जिसके बाद बुद्धिराम के परिजन उन्हें ढूंढने के लिए बाथरूम में पहुंचे। बाथरूम अंदर से बंद था। कुण्डी तोड़कर बाथरूम के गेट को खोला गया। बुद्धिराम का शव बाथरूम के फर्श पर पड़ा था। तुरंत उन्हें बेड पर लाया गया। डॉक्टर ने उन्हें देखा तो, उनकी मौत हो चुकी थी। अब बुद्धिराम के परिजन अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उनके पिता बेड पर नहीं थे तो, नर्सिंगकर्मियों ने इस पर क्यों ध्यान नहीं दिया।
पीएमओ के अलग तर्क
इस घटना को लेकर जब पीएमओ नगेंद्र भदौरिया से बात की तो, उन्होंने बताया कि बुद्धिराम चलने फिरने की हालत में थे। उनके परिजन उन्हें घुमाने के लिए और खाना खाने के लिए बेड से ग्राउंड फ्लोर तक ले जाते थे। इसलिए जब बुद्धिराम बेड पर नहीं थे तो, नर्सिंगकर्मियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जब वह बेड पर नहीं थे तो, अस्पताल के स्टाफ ने भी उन्हें ढूंढने की कोशिश नहीं की थी।

















































