लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
रितु मेहरा
रक्षाबंधन: भाई-बहन के प्रेम का अनुपम उत्सव
इस बार 9 अगस्त शनिवार को रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा । रक्षाबंधन की तैयारी को लेकर बाजारों में दुकानें सज गई है, चारों तरफ खुशी का माहौल है सबको इस पर्व का इंतजार है ।रक्षाबंधन, जिसे राखी के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसा पवित्र पर्व है जो भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम, सुरक्षा, और आस्था का प्रतीक है। यह त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई, बदले में, जीवनभर बहन की रक्षा करने का वचन देता है।
इतिहास और परंपराएँ
द्रौपदी और श्रीकृष्ण: जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था और उनका हाथ कट गया, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ में बाँधा। इस भावनात्मक बंधन को श्रीकृष्ण ने आजीवन निभाया।
रानी कर्णावती ने हुमायूं: को भेजी थी राखियां
रानी कर्णावती और हुमायूं: रानी कर्णावती ने मुग़ल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी थी, और हुमायूं ने उसकी रक्षा के लिए सेना भेज दी थी।
कौन लोग मनाते हैं?
रक्षाबंधन विशेष रूप से हिंदू धर्म में मनाया जाता है, लेकिन आज यह धार्मिक सीमाओं से परे, भारत के हर कोने में अलग-अलग समुदायों द्वारा अपनाया गया है।
जैन और सिख धर्म में भी इसकी मान्यता है।
कई मुस्लिम भाई-बहन भी सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मानकर राखी बाँधते हैं।
राखी का महत्व
पारिवारिक रिश्तों को सुदृढ़ बनाता है।सामाजिक समरसता का संदेश देता है।नारी सशक्तिकरण और सम्मान का प्रतीक है।आशीर्वाद, उपहार और प्रेम का आदान-प्रदान करता है ।भाई बहन को उसकी रक्षा, उसके मान-सम्मान की रक्षा का वचन देता है, निभाता भी है, एक दूसरे का आपसी भरोसा बढ़ता है।
️ रक्षाबंधन पर क्या करें?
बहनें सुंदर राखियाँ खरीदें या खुद बनाएँ। भाई अपनी बहनों को उपहार दें और वचन दें कि वे जीवनभर उनकी सुरक्षा करेंगे।परिवार के साथ भोजन करें और मिठाइयाँ बाँटें। बच्चों को भी संस्कार दें क्योंकि आजकल रेखा की जीवन हो गया है लोग रिश्तों को समझते नहीं है ऐसे में छोटे बच्चों को शुरू से ही तमाम रिश्तों की जानकारी दी जानी चाहिए।
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