लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
महेश झालानी वरिष्ठ पत्रकार
एक गैर राजनीतिज्ञ संगठन ने प्रधानमंत्री को गोपनीय पत्र लिखकर राजस्थान मूल के आईपीएस अधिकारियों में व्याप्त आक्रोश से अवगत कराते हुए हस्तक्षेप की मांग की है । पत्र की प्रति गृह मंत्री अमित शाह और डीओपीटी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह को भी प्रेषित की है ।
पत्र में कहा गया है कि स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते आईपीएस अधिकारियों में जबरदस्त आक्रोश है । कुछ अधिकारियों का स्पस्ट आरोप है कि प्रायोजित तरीके से राजस्थान के अधिकारियों को दरकिनार करते हुए बाहरी अधिकारियों को बेहतर पोस्टिंग दी जा रही है जो कदाचित उचित नही है । बहुत से ऐसे अफसर है जो पिछले कई साल से ठंड पी रहे है ।
गुमनाम पत्र भेजा
पत्र के अनुसार प्रदेश में डीजीपी का एक पद होता है । इसलिए इस पद पर एक ही व्यक्ति का ही चयन हो सकता है । माना कि राजीव शर्मा यूपी से ताल्लुक रखते है । बावजूद इसके वे वरिष्ठ होने के साथ साथ एक काबिल अफसर है । उनकी डीजीपी पद पर नियुक्ति से किसी को उज्र नही है ।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि जब यूआर साहू को आरपीएससी का चेयरमैन नियुक्त ही करना था तो यह काम छह माह पहले भी हो सकता था । ऐसे में डॉ रवि मेहरड़ा जैसे योग्य अफसर को डीजीपी बनने का अवसर मिलता । इससे पहले गहलोत सरकार ने भी स्थानीय अधिकारियों की उपेक्षा कर उमेश मिश्रा को वरिष्ठ नही होते हुए डीजीपी निगुक्त इसलिए नियुक्त किया था क्योकि इन्होंने गहलोत सरकार को बचाने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी । मिश्रा राजस्थान के नही, यूपी के मूल निवासी है ।
लगातार पांचवीं बार बाहरी व्यक्ति बना डीजीपी
ऐसा आरोप है कि इसी तरह हरियाणा के एमएल लाठर को भी इसलिए डीजीपी नियुक्त किया गया, क्योकि एडीजी (कानून और व्यवस्था) रहते हुए कोरोना की आड़ लेते हुए नाकाबंदी कर सचिन पायलट समर्थक विधायकों को मानेसर जाने से रोका । करीब दस विधायक मानेसर की ओर कूच कर चुके थे । लेकिन कोरोना की आड़ में सीमाओं नाकेबंदी करदी । परिणामतः गहलोत की सरकार को गिराने वाले विधायक मानेसर जाने से महरूम रह गए और गहलोत की डूबती सरकार बच गई । पुरस्कार स्वरूप लाठर को डीजीपी बना दिया गया । यानी पिछले पांच डीजीपी भूपेंद्र यादव, एमएल लाठर, उमेश मिश्रा, यूआर साहू (उड़ीसा) और राजीव शर्मा में से एक भी राजस्थान का अधिकारी डीजीपी नही बन पाया है । राजस्थान के भूपेंद्र दक का नाम फाइनल होने के बावजूद उनका नाम ऐन वक्त पर षड्यंत्रपूर्वक काट दिया गया ।
इसी तरह अशोक गहलोत ने अपने सबसे विश्वस्त बीएल सोनी को जबरदस्त झांसा देकर उन्हें डीजीपी नहीं बनाया । गहलोत ने इन्हें यूज तो खूब किया, लेकिन डीजीपी बनाने की बारी आई तो वे मुकर गए । लाठर कुछ दिनों बाद ही रिटायर होने वाले थे । गहलोत चाहते तो लाठर को अन्य जगह एडजस्ट कर सोनी को डीजीपी बना सकते थे । लेकिन दोहरे चरित्र के गहलोत ने सोनी को अंगूठा दिखाते हुए उमेश मिश्रा के सात दिन पहले ही डीजीपी के आदेश जारी कर सोनी के तमाम सपनों को चकनाचूर कर दिया ।
पत्र के अनुसार राजीव शर्मा के बाद अगला डीजीपी भी राजस्थान का बनेगा, इसमें भी संशय है । क्योकि उम्मीद है कि राजीव शर्मा के बाद संजय अग्रवाल की डीजीपी पद पर ताजपोशी होने की पूरी पूरी संभावना है । राजीव शर्मा जून, 2027 को डीजीपी पद से सेवानिवृत्त होंगे । तब तक वरिष्ठता के आधार पर राजेश निर्वाण, संजय अग्रवाल और गोविन्द गुप्ता ही सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन के हिसाब से शॉर्टलिस्ट हो सकते है ।
राज्य सरकार करीब दस व्यक्तियों का यूपीएससी को पैनल भेज सकती है । यूपीएससी इस पैनल में से केवल तीन अधिकारियों को योग्यता, अनुभव और विशिष्टता के आधार पर निर्वाण, अग्रवाल और गुप्ता के अलावा किसी और अधिकारी को शार्टलिस्ट कर ही नहीं सकती । तब तक आनंद श्रीवास्तव भी सेवानिवृत हो जाएंगे जिन्हें डीजीपी का प्रबल दावेदार बताया जा रहा था । ऐसे में यूपी के ही संजय अग्रवाल डीजीपी बन सकते है और राजस्थान के राजेश निर्वाण व गोविन्द गुप्ता रेस से बाहर हो जाएंगे ।
पत्र में एडीजी के पदस्थापन को लेकर भी तफसील से जिक्र किया है । एडीजी में सबसे महत्वपूर्ण पद क्राइम का माना जाता है । इस पद पर एमएन दिनेश कार्यरत है । ये राजस्थान से बाहर के निवासी है । क्राइम के बाद एडीजी विजिलेंस का पद महत्वपूर्ण होता है । इस पर संजीब नर्जरी काबिज है जिनका राजस्थान से कोई ताल्लुक नही है । जयपुर के पुलिस आयुक्त पद भी महत्वपूर्ण पदों में शुमार है । इस पर बीजू जॉर्ज अशोक गहलोत के जमाने से कार्यरत है । राजस्थान के बजाय ये भी केरल के निवासी है ।
एडीजी कार्मिक पद भी बहुत महत्वपूर्ण होता है । इस पर सहारनपुर के सचिन मित्तल और विपिन पांडे को भर्ती और पदोन्नति के एडीजी पद पर नियुक्त कर रखा है । पांडे भी राजस्थान के न होकर बिहार के है । इसके अलावा एसओजी भी महत्वपूर्ण पदों में शुमार है । इस पद पर बिहार के वीके सिंह कार्य कर रहे है । अजमेर के विशाल बंसल अवश्य कानून और व्यवस्था के एडीजी पद पर कार्यरत है । बाकी इनसाइडर अधिकारी हवा खा रहे है । कमोबेश यही हाल आईएएस का भी है । अधिकांश महत्वपूर्ण पदों पर राजस्थान के बाहर के अधिकारी काबिज है ।
पत्र में आशंका जाहिर की गई है कि आईपीएस की आने सूची में एक बार फिर से राजस्थानी आईपीएस ठगे जा सकते है । परम्परानुसार महत्वपूर्ण पदों पर बाहरी अफसरों को नियुक्ति दी जा सकती है । एसीबी डीजी और जयपुर पुलिस कमिश्नर पद हथियाने की होड़ मची हुई है । राजस्थान के अफसरों को उम्मीद नही है कि प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले अधिकारी इन पदों पर काबिज होंगे । ऐसा नही है कि गैर राजस्थानी सभी अफसर मजे में है । भूपेंद्र साहू, मालिनी अग्रवाल और सुष्मिता विश्वास जैसे अफसर लॉबिंग के अभाव में योग्य होते हुए भी बर्फ में लगे हुए है । लिस्ट बताएगी कि राजस्थान के अफसरों के साथ न्याय होता है या नही ।










































