लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम-कुसुम योजना के तहत राजस्थान में सौर ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य में ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है।
⚡ रिकॉर्ड स्तर पर सौर संयंत्र स्थापना
राज्य में अब तक 3585 मेगावाट क्षमता के 1617 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इनमें से 3462 मेगावाट के 1525 संयंत्र वर्तमान सरकार के कार्यकाल (पिछले लगभग 2 वर्ष 3 माह) में लगाए गए हैं।
यह उपलब्धि योजना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और जनभागीदारी को दर्शाती है।
कुसुम कम्पोनेंट-ए में राजस्थान नंबर 1
- कम्पोनेंट-ए: 686 मेगावाट के 496 संयंत्र (देश में प्रथम स्थान)
- कम्पोनेंट-सी: 2899 मेगावाट के 1121 संयंत्र (देश में द्वितीय स्थान)
फीडर लेवल सोलराइजेशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल द्वारा राजस्थान डिस्कॉम्स को गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
किसानों को दिन में बिजली
मुख्यमंत्री ने 2027 तक किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।
- योजना से 2.29 लाख से अधिक किसानों को दिन में सिंचाई हेतु बिजली मिल रही है
- इससे कृषि उत्पादकता और जीवन स्तर में सुधार हुआ है
तेजी से बढ़ रही स्थापना गति
- जयपुर, जोधपुर, अजमेर में हर दिन 3–4 नए प्लांट
- रोजाना लगभग 10 मेगावाट क्षमता ग्रिड से जुड़ रही
- जनवरी: 286 मेगावाट
- फरवरी: 295 मेगावाट
जिलों में प्रमुख उपलब्धियां
कम्पोनेंट-ए:
- बीकानेर: 86 प्लांट
- जोधपुर: 34
- झुंझुनूं: 32
कम्पोनेंट-सी (सोलर पंप):
- फलौदी: 24,561
- जोधपुर: 22,469
- बीकानेर: 22,003
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
- 1000+ नए सोलर उद्यमी तैयार
- अनुपजाऊ भूमि का उपयोग
- किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत
- कोयले पर निर्भरता में कमी
तकनीकी और प्रशासनिक सुधार
- त्वरित LOA, PPA और ग्रिड कनेक्शन
- 33 केवी सब-स्टेशन से 5 किमी दायरे में प्लांट की अनुमति
- बिजली का स्थानीय उपयोग → कम ट्रांसमिशन लॉस
राम नवमी पर विशेष उपलब्धि
राम नवमी के अवसर पर:
- 12 नए सौर संयंत्र स्थापित
- कुल क्षमता: 23.60 मेगावाट
- जयपुर, अजमेर, जोधपुर में 4-4 प्लांट
➡️ इनसे 2000+ किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध होगी
पीएम-कुसुम योजना ने राजस्थान में
- ऊर्जा उत्पादन
- किसान सशक्तिकरण
- ग्रामीण विकास
तीनों क्षेत्रों में एक साथ बदलाव लाया है।
किसान अब केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बन रहे हैं—यही इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है।


















































