लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
7 माह में 1700 नए एम-पैक्स गठित
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में सहकारिता का नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अंत्योदय की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए राज्य की पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर नए एम-पैक्स का गठन किया जा रहा है।
लक्ष्य से 31% अधिक गठन, 7 माह में 1700 नए एम-पैक्स
राज्य सरकार ने बजट 2025-26 में दो वर्षों के भीतर लगभग 2600 ग्राम पंचायतों में नए पैक्स गठन की घोषणा की थी। इसके लिए सहकारिता विभाग ने 2025-26 और 2026-27 में 1300-1300 पैक्स के गठन का लक्ष्य निर्धारित किया था।
लेकिन इस वित्तीय वर्ष में अक्टूबर के अंत तक ही 1700 नए पैक्स गठित किए जा चुके हैं, जो वार्षिक लक्ष्य से 31% अधिक और दो वर्षीय लक्ष्य का 65% से भी अधिक है।
वर्ष 2024-25 में भी 297 पैक्स गठन का लक्ष्य था, जबकि सरकार ने 857 पैक्स बनाकर 288.5% उपलब्धि दर्ज की थी।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति में अग्रणी भूमिका
केंद्र सरकार की नई ‘राष्ट्रीय सहकारिता नीति’ और ‘सहकार से समृद्धि’ परिकल्पना के तहत देशभर में सहकारिता के विस्तार पर जोर दिया गया है।
राजस्थान इस दिशा में अग्रणी है, जहाँ वर्तमान में 8,840 पैक्स का नेटवर्क मौजूद है, जिनमें से 8,823 क्रियाशील हैं। पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में तेजी से गठन से राज्य में जमीनी स्तर पर सहकारिता मजबूत हो रही है।
पैक्स को मिल रहा बहुउद्देशीय स्वरूप
राज्य सरकार पैक्स को समयानुकूल और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए उन्हें एम-पैक्स में परिवर्तित कर रही है।
जहाँ पहले पैक्स की भूमिका केवल ऋण वितरण व खाद-बीज उपलब्ध कराने तक सीमित थी, वहीं अब इन समितियों को विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे अधिक प्रतिस्पर्धी और आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।
इसके अलावा, पहले सहकारी समितियों में किसान ही मुख्य सदस्य होते थे, जबकि अब इनका दायरा बढ़ाते हुए बंटाईदारों, कारीगरों, शिल्पकारों, पशुपालकों और छोटे उद्यमियों को भी जोड़ा जा रहा है।













































