राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन बनी राजनेताओं के बेटे- भाई- भतीजों का आसान एंट्री क्लब
जब खेल मैदान नेता पुत्रों के लॉन्चपैड बन जाएं”
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
हेमराज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार
जयपुर। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) का गठन कभी राज्य में क्रिकेट की प्रतिभाओं को मंच देने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन अब यह संस्था एक ऐसी संरचना बन चुकी है, जहां नेताओं के पराजित राजनीतिक कैरियर और उनके पुत्रों के सपनों की पुनर्जन्मस्थली बनाई जा रही है।
अब RCA में चयन का मापदंड न क्रिकेट की समझ है, न खेल का अनुभव — केवल राजनीतिक संबंध, पद, और पहचान।
आरोपों की तह में:
RCA के नाम पर कागजी जिला क्रिकेट संघ, फर्जी रजिस्ट्रेशन, और बिना खेल मैदान के जिलों में क्रिकेट गतिविधियों का दावा — यह सब सिर्फ चुनावी गणित और बोर्ड पर नियंत्रण के लिए किया जा रहा है।
RCA के पास करोड़ों रुपये BCCI से हर साल आते हैं, लेकिन राजस्थान के जिलों में क्रिकेट का कोई ठोस ढांचा नहीं खड़ा किया गया।
राजनीति के नए खिलाड़ी — नेता पुत्रों की टीम:
पहले से मौजूद नेता:
सी.पी. जोशी – RCA में वरिष्ठ नेता के तौर पर प्रभाव।
वैभव गहलोत – पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र, RCA अध्यक्ष भी रह चुके।
जयदीप बिहानी विधायक श्रीगंगानगर
पिंकेश पोरवाल बीजेपी नेता
अमीन पठान- कांग्रेस नेता
हालिया घुसपैठ (2024-25):
1. राजेंद्र राठौड़ के पुत्र प्राक्रम सिंह – RCA में प्रवेश की सक्रिय कोशिशें।
2. गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र डॉ. धनंजय खींवसर– BJP सरकार बनते ही RCA अध्यक्ष बने, लेकिन जल्द ही विरोध के चलते हटाए गए।
3. ग़रीब जिलों से नेता पुत्रों की नियुक्ति –
घनश्याम तिवाड़ी के पुत्र
जसवंत सिंह यादव के पुत्र
प्रतापगढ़ भाजपा जिला पदाधिकारी के पुत्र
सवाल यह नहीं है कि ये लोग क्रिकेट समझते हैं या नहीं, सवाल यह है कि क्या RCA अब ‘पॉलिटिकल गेस्ट हाउस’ बन गया है, जहाँ सत्ता परिवर्तन के साथ चेहरे बदल जाते हैं, पर नीयत नहीं।
क्रिकेट कहाँ है?
राज्य के अधिकांश जिलों में न तो स्टेडियम हैं, न प्रशिक्षित कोच, न ही नियमित टूर्नामेंट का आयोजन।
बावजूद इसके कागज़ी जिला क्रिकेट संघ बना दिए गए हैं, जो RCA चुनाव में वोटिंग अधिकार रखते हैं।
“हमारे जिले में न कोई मैदान है, न कोई नियमित क्रिकेट लीग – लेकिन हर साल चुनाव के समय 3 नए क्रिकेट क्लब बना दिए जाते हैं।”
नाम न छापने की शर्त पर एक जिला संघ प्रतिनिधि
RCA चुनाव — लोकतंत्र का मज़ाक:
RCA में 2018 के बाद से नियमित चुनाव नहीं हुए।
अब तक 5 बार एंडो कमेटी (Ad-hoc Committee) का कार्यकाल बढ़ाया गया।
छठी बार भी कमेटी का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है, और नए चेहरों के बहाने राजनीति का पुराना खेल खेला जा रहा है।
वित्तीय भ्रष्टाचार और सत्ता-लोलुपता:
RCA को BCCI से ₹40–₹60 करोड़ सालाना मिलते हैं।
RTI से मिले दस्तावेज़ों में पाया गया कि पिछले 3 साल में RCA ने स्टेडियम के नाम पर ₹27 करोड़ खर्च दिखाए, लेकिन अभी तक कोई नया ग्राउंड कार्यरत नहीं हुआ।
पिछले RCA अध्यक्षों ने व्यक्तिगत टूर और निजी होटलों पर लाखों रुपये खर्च किए, जिसे “क्रिकेट डेवलपमेंट एक्सपेंसेज़” बताया गया।
राजनीतिक हस्तक्षेप का खतरनाक असर:
योग्य खिलाड़ियों की अनदेखी पलायन और निराशा कोचिंग/ट्रायल में गुटबाज़ी खेल की गिरती गुणवत्ता
जिला संघों में भाई–भतीजावाद खेल नहीं, गुट मजबूत RCA में नेता पुत्रों का बोलबाला क्रिकेट का ‘वंशवाद’
1. RCA को RTI के दायरे में लाया जाए — ताकि फंडिंग और चयन प्रक्रिया पारदर्शी बने।
2. RCA चुनाव निर्वाचन आयोग की निगरानी में कराए जाएं।
3. नेता या उनके परिजन RCA पदों से वर्जित हों।
4. जिला संघों को मान्यता तभी मिले जब वे सालाना कम से कम 10 मैच करवाएं और स्टेडियम हो।
5. पूर्व अंतरराष्ट्रीय/रणजी खिलाड़ियों की समिति चयन और निगरानी में नियुक्त हो।
राजस्थान क्रिकेट का भविष्य इस समय नेताओं की उंगलियों से बंधा हुआ है। RCA आज एक राजनीतिक चाणक्य नीति की प्रयोगशाला बन चुका है, जहाँ खिलाड़ी नहीं, राजनीतिक उत्तराधिकारी तैयार किए जा रहे हैं।
यह RCA का नहीं, राजस्थान के क्रिकेट प्रेमियों और खिलाड़ियों का अपमान है।
यदि अभी भी जवाबदेही नहीं तय हुई, तो आने वाले वर्षों में RCA सिर्फ एक नाम रह जाएगा — क्रिकेट से कटे हुए नेताओं का क्लब।
क्या आपके पास RCA में भ्रष्टाचार, पक्षपात या घोटालों से जुड़ी जानकारी है?
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