पिण्डवाड़ा में चुना पत्थर खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध

0
52
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क 

चार ग्राम पंचायतों ने एकमत होकर किया खनन का बहिष्कार, भीमाना में होगा विशाल धरना प्रदर्शन

सिरोही।
पिण्डवाड़ा तहसील क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर (लाइमस्टोन) खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार और गुरुवार को वाटेरा ग्राम पंचायत के थम्ब बाबा मंदिर प्रांगण में वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा – इन चार ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण एकजुट हुए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि किसी भी कीमत पर इस परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी जनता के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।

5 अक्टूबर को भीमाना में विशाल धरना

ग्रामीणों ने घोषणा की कि आगामी रविवार, 5 अक्टूबर को भीमाना गांव में विशाल धरना प्रदर्शन होगा, जिसमें हजारों की भीड़ जुटने की संभावना है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने खनन परियोजना पर रोक नहीं लगाई, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

खनन से बढ़ेंगे खतरे

ग्रामीण नेताओं ने कहा कि –

  • परियोजना करीब 800 हेक्टेयर भूमि पर फैली है।

  • यह इलाका अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है, जिस पर खनन से प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ जाएगा।

  • भूजल स्तर गिरने, खेती योग्य जमीन के बंजर होने और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं सामने आएंगी।

  • धूल और प्रदूषण से सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।

कंपनी को मिली स्वीकृति, नाराज ग्रामीण

जानकारी के मुताबिक, जयपुर स्थित मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को पिण्डवाड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों – वाटेरा, भीमाना, भारजा, रोहिड़ा, तरुँगी और डोरीफली – की लगभग 800 हेक्टेयर भूमि पर चुना पत्थर खनन की स्वीकृति दी गई है।

इससे ग्रामीणों में आक्रोश है और उनका कहना है कि यदि कंपनी ने काम शुरू किया तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों की आवाज

सभा के दौरान ग्रामीणों ने साफ कहा –

  • “खनन से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होगा और अरावली की पहचान मिट जाएगी।”

  • “खेती की जमीन बंजर होगी, जलस्रोत सूख जाएंगे और गांव-गांव में बीमारी फैलेगी।”

  • “सिलिकोसिस यहां के लोगों की जिंदगी पर बड़ा खतरा बनेगी।”

  • “हम किसी भी हालत में खनन नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए हमें मर मिटना पड़े।”

जनआंदोलन की सुगबुगाहट

चार घंटे चली रणनीतिक बैठक के बाद तय हुआ कि आंदोलन अब और व्यापक स्तर पर फैलाया जाएगा। सभा में मौजूद हजारों ग्रामीणों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि अरावली और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा के लिए खनन परियोजना को हर हाल में रोकेंगे।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here