फूल का भारी पर्चा है काबरी महादेव जी

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

सावन माह में रहती है शिवभक्तों की भारी भीड़ 
शिव रात्रि व हर अमावस्या का लगता है मन्दिर पर मेला।

गौतमशर्मा
राजसमन्द।

राजसमंद। जिले के चंद्रभागा नदी व डींगरोल नाले के बीच में स्थित है देवों के देव काबरी महादेव मंदिर स्थित है यह मंदिर करीब 700 साल पुराना है केलवा राजघराने के ठाकुर ने शिखर का निर्माण करवाया था पुरानी मान्यता है कि यहां शिवलिंग स्वत प्रकट हुए हैं हुआ यूं की गलवा गांव से जो गाये यहां घास चरने के लिए आती थी तो उनके थनों से यहां स्वत दूध गिरता था ऐसे में गाय मालिक वाले ग्वाल से को प्रतिदिन झगड़ा करता था

कि इसका दूध कौन निकाल लेता है तो उसके बाद वह गाय मालिक गाय के पास पहुंचा तो गाय के थन से दूध गिरते हुए नजर देखा नीचे देखा तो शिवलिंग नजर आया ऐसे में उन्होंने यह बात ग्रामीणों को बताई ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे जहां पर खुदाई की इस उपरांत काबरी गांव से भी कई ग्रामीण दौड़कर आए और शिवलिंग की खुदाई की गई तो शिवलिंग स्वत ऊपर आ गया ऐसे में इनका नाम काबरी महादेव रखा गया है इस मंदिर पर 4 सौ साल पुराने एक बलदेव महाराज की जीवित समाधि भी स्थापित है बताएं कि काबरी महादेव जी फूल का पर्चा है जो भी व्यापारी या ग्रामीण अपना नया प्रतिष्ठान शुरू करता है उससे पहले फुल मांगता है

अगर फूल दे देते हैं तो उसकी मन्नत पूरी होती है सावन के तीसरे सोमवार पर शिव जी के मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहा वहीं मंदिर की ओर आने वाले चारों रास्तों पर श्रद्धालुओं का आना-जाना रहा सुबह से ही मंदिर परिसर पर श्रद्धालु पहुंचे हैं जहां पर शिव जी को जलाभिषेक दुग्ध अभिषेक वह बिली पत्र चढ़कर नमन किया है राजसमन्द जिला प्रमुख रत्नीदेवी चौधरी एवं समाजसेवी माधव चौधरी भी सावन माह के तीसरे सोमवार को मंदिर परिसर पर पहुंचे हैं और शिव जी को जलाभिषेक दुग्धभिषेक करके नमन किया और जिले भर में अमन चैन और खुशीयाली की कामना की गई है।बतायानकी इस मंदिर के आसपास सभी समाज की सराय बनी हुई हैं और सावन के पूरे माह शिव भक्त कावड़ यात्रा भी लेकर आते हैं शिवजी को काफी प्रसन्न करते है वहीं पंडितों के विशेष मंत्र चार से मंदिर गूंज उठताहै और इस मंदिर पर दर्शन के लिए राजसमंद भीलवाड़ा चित्तौड़ उदयपुर सहित मेवाड़ मारवाड़ क्षेत्र के कई श्रद्धालु आते हैं और दर्शनों का लाभ लेते हैं ।

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