लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
अजमेर | नितिन मेहरा
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि “ऑपरेशन सिन्दूर भारतीय सेना के शौर्य की गाथा है, जिस पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है।” उन्होंने युवाओं से अपने इतिहास से सीखने और प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत का विभाजन एक ऐसी पीड़ा है जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। करोड़ों लोगों ने इसकी त्रासदी झेली है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय एकता का संकल्प
महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में 14 अगस्त को भारत के विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को राष्ट्रीय एकता के संकल्प के रूप में मनाया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के सिंधुशोध पीठ और भारतीय सेना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
मुख्य अतिथि देवनानी ने विभाजन को भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय बताते हुए प्रधानमंत्री द्वारा विभाजन विभीषिका दिवस मनाने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह स्मृतियां भविष्य की पीढ़ियों को सतर्क और एकजुट रहने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, सेना और नेतृत्व पर भरोसा रखने तथा समाज को बांटने वाली किसी भी शक्ति के विरुद्ध खड़े होने का आह्वान किया।
विभाजन: सांस्कृतिक और मानसिक आघात
कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि विभाजन केवल भौगोलिक बंटवारा नहीं था, बल्कि यह एक गहरा सांस्कृतिक और मानसिक आघात भी था। उन्होंने इतिहास और साहित्य में विभाजन के सटीक व यथार्थ चित्रण की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि युवा पीढ़ी में बिना किसी भ्रम के राष्ट्र प्रेम को बढ़ावा मिले।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की बहादुरी, रणनीतिक कौशल और आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” नीति का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में टेक्नो-नेशनलिज्म और आर्थिक देशभक्ति (Economic Patriotism) पर जोर दिया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय में स्वदेशी कंसोर्टियम की स्थापना की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य स्वदेशी नवाचारों का प्रचार-प्रसार करना है।
भारत की स्वतंत्रता केवल अहिंसा से नहीं मिली
विशिष्ट अतिथि एवं शिक्षाविद् देवदत्त जोशी ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल अहिंसा से नहीं, बल्कि लंबे और कठिन संघर्षों के बाद प्राप्त हुई। उन्होंने 1905 से शुरू हुई विभाजन की राजनीति और 1947 के बंटवारे में हुए भीषण विस्थापन व जनहानि को याद किया। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं दशकों की योजनाओं और षड्यंत्रों का परिणाम थीं, जिन्हें याद रखना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां न बनें।
ऑपरेशन सिन्दूर में भारतीय सेना का पराक्रम
भारतीय सेना के ब्रिगेडियर के. रविचंद्रन ने ऑपरेशन सिन्दूर पर बोलते हुए कहा कि पहलगांव की आतंकी घटना, जिसमें धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों की हत्या की गई, मानवता के लिए शर्मनाक है। उन्होंने विस्तार से बताया कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने वहां तबाही मचाई, लेकिन भारतीय सेना ने अदम्य साहस और पराक्रम दिखाते हुए ऑपरेशन सिन्दूर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।












































