लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सभी ग्रामीण बैंकों को संवेदनशीलता बरतने के निर्देश
भुवनेश्वर/नई दिल्ली | वरिष्ठ संवाददाता नितिन मेहरा (राजस्थान)
ओडिशा के क्योंझर जिले में बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली चर्चित घटना के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। कथित तौर पर अपनी दिवंगत बहन के बैंक खाते में जमा राशि निकालने के लिए एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा उसके कंकाल के अवशेष बैंक तक लाने की घटना पर कार्रवाई करते हुए संबंधित शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को ग्राहकों, विशेषकर ग्रामीण और कमजोर वर्गों के प्रति मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार अपनाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला ओडिशा के क्योंझर जिले के डियानाली गांव का है। जानकारी के अनुसार, जीतू मुंडा अपनी दिवंगत बहन कलरा मुंडा के बचत खाते में जमा ₹19,402 की राशि निकालने के लिए कई दिनों से बैंक और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा था।
खाते में नामित वारिस (नॉमिनी) नहीं होने के कारण बैंक की ओर से कानूनी वारिस प्रमाणपत्र और मृत्यु प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेज मांगे गए। आवश्यक दस्तावेज जुटाने में असमर्थ जीतू मुंडा ने कथित तौर पर अपनी बहन के शव के अवशेष कब्र से निकालकर उन्हें बैंक शाखा तक पहुंचा दिया। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
सरकार ने उठाए सख्त कदम
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि—
- प्राथमिक जांच के बाद संबंधित ओडिशा ग्राम्य बैंक शाखा के प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को ग्राहकों के साथ संवेदनशील और पारदर्शी व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
- बैंक कर्मचारियों को विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मामलों में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने और प्रभावी संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
प्रशासन की पहल के बाद मिला भुगतान
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में मदद की। इसके बाद जीतू मुंडा और अन्य वैध वारिसों को बैंक खाते में जमा ₹19,402 की राशि का भुगतान कर दिया गया। पुलिस की मौजूदगी में शव के अवशेषों का दोबारा सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार भी कराया गया।
बैंकिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रक्रियाओं की जटिलता और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन उनके अनुपालन के दौरान मानवीय दृष्टिकोण और जरूरतमंद लोगों की सहायता को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सरकार की त्वरित कार्रवाई को बैंकिंग संस्थानों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि प्रक्रियागत नियमों के साथ-साथ नागरिकों के सम्मान और संवेदनशील व्यवहार को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
