लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
बच्चों में समय पर पहचान और उपचार पर जोर
नागौर (प्रदीप कुमार डागा) – ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड की ओर से बुधवार को जिला टीबी क्लिनिक में पीडियाट्रिक टीबी (बाल टीबी) विषय पर हब साइट प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों में टीबी की समय पर पहचान, जांच और उपचार को सुदृढ़ बनाना रहा।
सैंपल कलेक्शन की तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों में सैंपल लेने की जटिल प्रक्रिया को आसान तरीके से समझाया।
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गैस्ट्रिक एस्पिरेट (GA)
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इंड्यूस्ड स्पुटम तकनीक
के माध्यम से सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया पर मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग ऑफिसर और पीडियाट्रिशियन को विस्तृत जानकारी दी गई।
हर संदिग्ध बच्चे की स्क्रीनिंग जरूरी
कार्यक्रम में निर्देश दिए गए कि:
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0–14 वर्ष के सभी लक्षणयुक्त बच्चों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाए
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प्रत्येक संभावित मरीज का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए

टीबी मुक्त भारत अभियान पर जोर
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जुगल किशोर सैनी ने कहा:
“टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। बच्चों में टीबी की शीघ्र पहचान और उपचार ही इस अभियान की सफलता की कुंजी है।”
जिला टीबी अधिकारी डॉ. श्रवण राव ने भी फील्ड स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और संदिग्ध मामलों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
20 हब साइट्स के स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण में 20 पब्लिक हब साइट्स से आए मेडिकल ऑफिसर, पीडियाट्रिशियन और नर्सिंग ऑफिसर्स ने भाग लिया।
जिला कार्यक्रम समन्वयक हेमंत उज्जवल ने कहा कि सही समय पर पहचान और सटीक सैंपल कलेक्शन ही प्रभावी उपचार की आधारशिला है।
आयोजन में रहा विशेष सहयोग
कार्यक्रम के सफल आयोजन में:
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जिला प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर जिशान मिर्जा (ममता)
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स्टेट नर्स मेंटर वेदांश जी
का विशेष योगदान रहा।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम टीबी उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों को और मजबूत करने वाला साबित हुआ।


















































