लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नागौर (प्रदीप कुमार डागा) – बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) की बैठक कलक्टर सभागार में जिला परिषद सीईओ अरविंद जाखड़ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में वन स्टॉप सेंटर एवं जिला स्तरीय महिला समाधान समिति की बैठक भी आयोजित की गई।
बैठक में महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक जितेंद्र शर्मा ने योजना की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए 13 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें बेटी जन्मोत्सव, राष्ट्रीय बालिका दिवस, अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और किशोरी बालिकाओं के लिए एक्सपोज़र विजिट आयोजित कर 66 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया।

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सीईओ अरविंद जाखड़ ने बैठक में निर्देश दिए कि DTF और BTF की बैठकें समय पर आयोजित हों।
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वन स्टॉप सेंटर सखी योजना की प्रगति पर चर्चा की गई।
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महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र के प्रतिनिधियों ने घरेलू हिंसा, नाता प्रथा, बाल विवाह जैसी घटनाओं के समाधान के लिए काउंसिलिंग के माध्यम से कार्यों की जानकारी दी।
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शिक्षा विभाग ने शाला पूर्व शिक्षा एवं स्वास्थ्य-पोषण संबंधी कार्यों की समीक्षा की।
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चिकित्सा विभाग ने लाडो प्रोत्साहन योजना का विवरण दिया। योजना के तहत बेटी के जन्म पर सात किस्तों में कुल 1.50 लाख रुपये लाभार्थी के खाते में ऑनलाइन भुगतान किए जाते हैं। इसके साथ ही पौधरोपण बेटी के नाम पर करने का निर्देश भी दिया गया।
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पोषण योजनाओं के तहत कुपोषित बच्चों को पोषण किट उपलब्ध कराई जा रही है।
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पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान योजना के तहत महिलाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पुरस्कार राशि (11-11 हजार रुपये) प्रदान की जाती है।
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काली बाई भील उड़ान योजना सहित विभिन्न महिला कल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

सीईओ जाखड़ ने बैठक में सभी अधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि योजना के सभी लक्ष्यों को समयबद्ध और गुणवत्ता पूर्ण तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से यह कहा कि बेटी के जन्म पर पौधा उसके नाम से ही लगवाया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और बेटी के प्रति सम्मान दोनों का संदेश समाज में फैल सके।
बैठक में महिला सुरक्षा केंद्र, नारी निकेतन, वन स्टॉप सेंटर सहित अन्य संस्थाओं द्वारा महिलाओं को प्रदान की जा रही सहायता की समीक्षा भी की गई।
बैठक का उद्देश्य जिला स्तरीय योजना क्रियान्वयन की समीक्षा, सुधार और बेटियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था।



















































