लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नागौर (रियांबड़ी) – राजस्थान के नागौर जिले के रियांबड़ी उपखंड के भंवाल गांव में स्थित भंवाल माता मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।
करीब 800 वर्ष पुराने इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसका निर्माण डाकुओं द्वारा करवाया गया था।
ढाई प्याले मदिरा का अनोखा भोग
इस मंदिर की सबसे खास परंपरा है कि यहां माता को ढाई प्याले मदिरा (शराब) का भोग लगाया जाता है।
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चांदी के प्याले में मदिरा भरकर देवी के समक्ष अर्पित की जाती है
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पुजारी आंखें बंद कर माता से भोग स्वीकार करने का आग्रह करते हैं
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यह परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है
यह अनूठी परंपरा भक्तों के लिए आस्था के साथ-साथ एक रहस्य भी बनी हुई है।
नवरात्रि में लगता है भव्य मेला
हर साल नवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
आस्था और परंपरा का संगम
भंवाल माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह राजस्थान की लोक परंपराओं और मान्यताओं की अनोखी झलक भी प्रस्तुत करता है।
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