लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
लेक्रोस का राष्ट्रीय केंद्र बन रहा राजस्थान का आदिवासी अंचल
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में खेलों को नई दिशा और खिलाड़ियों को नई पहचान मिल रही है। राज्य सरकार की दूरदर्शी खेल नीति और जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस के चलते दक्षिणी राजस्थान का आदिवासी अंचल अब अंतरराष्ट्रीय खेल लेक्रोस का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभर रहा है। विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं, आधुनिक प्रशिक्षण और अनुभवी प्रशिक्षकों की बदौलत यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।
लॉस एंजेल्स ओलंपिक-2028 पर सरकार की नजर
वर्ष 1908 के बाद लेक्रोस को एक बार फिर लॉस एंजेल्स ओलंपिक-2028 में शामिल किया गया है। इसे देखते हुए राजस्थान सरकार ने अभी से खिलाड़ियों को ओलंपिक स्तर की तैयारी कराने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और राजस्थान का गौरव बढ़ा सकें।
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का दबदबा
सरकारी प्रयासों का असर खेल परिणामों में भी साफ दिखाई दे रहा है। तृतीय राष्ट्रीय लेक्रोस चैंपियनशिप में राजस्थान के जनजातीय क्षेत्र के 55 खिलाड़ियों ने छह वर्गों में हिस्सा लेकर 5 स्वर्ण और 1 कांस्य पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धि प्रदेश की बढ़ती खेल क्षमता और खिलाड़ियों की प्रतिभा का प्रमाण है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चमके जनजातीय खिलाड़ी
राजस्थान की जनजातीय बेटियों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। जून 2024 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित एशियन महिला लेक्रोस चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने रजत पदक जीता। इसके बाद फरवरी 2026 में सऊदी अरब के रियाद में आयोजित एशियन लेक्रोस गेम्स में राजस्थान के जनजातीय बालक एवं बालिका खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
तीन वर्षों में 19 पदक, 15 स्वर्ण
पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय लेक्रोस प्रतियोगिताओं में राजस्थान ने अपना वर्चस्व स्थापित किया है। प्रदेश ने कुल 22 स्वर्ण पदकों में से 15 स्वर्ण सहित 19 पदक जीतकर देश में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। सरकार की खेल नीति, निरंतर प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की पहल इन उपलब्धियों की प्रमुख वजह मानी जा रही है।
देश की पहली समर्पित लेक्रोस अकादमी उदयपुर में
राज्य सरकार ने उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप खेलगांव में देश की पहली समर्पित लेक्रोस अकादमी विकसित की है। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्राकृतिक घास वाला विश्वस्तरीय मैदान, आधुनिक खेल उपकरण और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है। यह अकादमी अब देशभर के खिलाड़ियों, विशेषकर जनजातीय युवाओं के लिए उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बन चुकी है।
जनजातीय युवाओं के लिए खुल रहे नए अवसर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम भी हैं। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं की खोज, आधुनिक प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं को खेलों से जोड़कर उनके लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
सरकार की प्रतिबद्धता, विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों की मेहनत के बल पर राजस्थान अब लॉस एंजेल्स ओलंपिक-2028 की तैयारियों में जुट चुका है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में प्रदेश के जनजातीय खिलाड़ी विश्व मंच पर भारत का तिरंगा बुलंद कर राजस्थान का नाम और ऊंचा करेंगे।