लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सौर शक्ति से सशक्त राजस्थान: आत्मनिर्भर प्रदेश का नया सूरज
जयपुर। नववर्ष के आगमन के साथ राजस्थान में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगी हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और त्वरित निर्णयों के चलते राजस्थान में आमजन के घर सूर्यघर बन रहे हैं, खेतों में सौर ऊर्जा से पानी की सिंचाई हो रही है और प्रदेश देश में नंबर वन सोलर स्टेट के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राजस्थान की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 35,910 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
ऊर्जा संकट से ऊर्जा सरप्लस की ओर
राजस्थान अब अधिकतर दिनों में सूर्य की रोशनी से चलने वाले ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर होकर ऊर्जा संकट से ऊर्जा सरप्लस की दिशा में बढ़ रहा है। दो साल में प्रदेश की सौर ऊर्जा क्षमता 18,000 मेगावाट बढ़ी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत निर्णय तेज किए और निवेश में बाधाओं को दूर कर परियोजनाओं को समय पर पूरा किया।
राज्य की भौगोलिक स्थिति सौर ऊर्जा के लिए अत्यंत अनुकूल है। वर्तमान में देश की कुल सौर क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत राजस्थान में स्थापित है। प्रदेश की भूमि पर लगे 1 लाख मेगावाट सौर परियोजनाओं में से 31,000 मेगावाट का योगदान राजस्थान का है।

पीएम कुसुम और पीएम सूर्यघर योजनाओं में राजस्थान की सफलता
राज्य सरकार ने पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर योजना को प्रभावी रूप से लागू किया। इसके परिणामस्वरूप:
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पीएम कुसुम योजना की क्षमता 122 मेगावाट से बढ़कर 2,629 मेगावाट हुई।
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2,629 मेगावाट क्षमता से 1,201 लघु सौर ऊर्जा परियोजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की गई।
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पीएम कुसुम योजना के तहत 2,83,000 किसानों को दिन में बिजली मिल रही है।
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पीएम सूर्यघर योजना में 1,20,162 रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 481 मेगावाट है।
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उपभोक्ताओं को इस योजना में 824 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है।
सौर ऊर्जा से किसानों की डीजल पंपों पर निर्भरता कम हुई है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना से बचत बढ़ रही है।
पीक ऑवर्स की डिमांड पूरी करने के लिए बैटरी भंडारण
प्रदेश में पीक ऑवर्स में अधिकतम डिमांड 19,165 मेगावाट रही है, जो 2030 तक 25,048 मेगावाट होने का अनुमान है। इसे ध्यान में रखते हुए बीकानेर के पूगल में 6,400 मेगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 2,450 मेगावाट क्षमता का देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क भी तैयार किया जा रहा है। नवम्बर 2027 तक इन परियोजनाओं से महंगी बिजली की खरीद से मुक्ति मिलेगी।
स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 के तहत राज्य सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 10 गीगावाट ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।
















































