लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राज्य सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर विशेष
2 साल: नव उत्थान–नई पहचान | बढ़ता राजस्थान–हमारा राजस्थान
माल परिवहन लागत में कमी की दिशा में निर्णायक कदम
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में परिवहन एवं लॉजिस्टिक अवसंरचना के विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य सरकार द्वारा बीते दो वर्षों में किए गए प्रयासों से माल परिवहन को अधिक सुलभ, त्वरित और किफायती बनाने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं।
दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की रीढ़ माने जाने वाले पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के राजस्थान से गुजरने वाले खंड में सभी फ्रेट स्टेशनों को ऑल-वेदर टू-लेन सड़कों से जोड़ने का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। इससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ लॉजिस्टिक लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
112 करोड़ की लागत से 59 किमी टू-लेन सड़कें
राज्य सरकार द्वारा पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के 12 नवीन फ्रेट स्टेशनों तक कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने के लिए लगभग 112 करोड़ रुपये की लागत से 59 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से किशनगढ़, मारवाड़ जंक्शन, केशवगंज और बनास—चार स्टेशनों तक सड़क निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
शेष आठ स्टेशनों—श्रीमाधोपुर, सराधना, हरिपुर, चंडावल, जवाली, बिरोलिया, साखून एवं स्वरूपगंज—को भी टू-लेन सड़कों से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। इन परियोजनाओं से कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में आसानी होगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
अतिरिक्त कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी प्रगति पर
फ्रेट कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए बधाल डीएफसीसी टर्मिनल को राष्ट्रीय राजमार्ग-52 से जोड़ने हेतु 95 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। वहीं, मुख्य जिला सड़क-81 पर बागावास बाईपास निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जहां भूमि अधिग्रहण अंतिम चरण में है।
इसके अतिरिक्त मंडा रीको औद्योगिक क्षेत्र को लालासर (एमडीआर-81) से जोड़ने के लिए 9 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है और निर्माण कार्य जारी है।
564 किमी फ्रेट कॉरिडोर, 18 नए स्टेशन
भारतीय रेलवे द्वारा विकसित 1504 किलोमीटर लंबे पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में से लगभग 564 किलोमीटर हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है। इस खंड में 18 नए फ्रेट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 स्टेशन पहले समुचित सड़क सुविधा से वंचित थे। राज्य सरकार की बजट घोषणा के बाद अब इन सभी स्टेशनों को ऑल-वेदर सड़कों से जोड़ने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इन प्रयासों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार माल परिवहन लागत में कमी, औद्योगिक विकास और समग्र आर्थिक प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान लॉजिस्टिक हब के रूप में नई पहचान की ओर अग्रसर है।
















































