मित्रता दिवस मनाने का चलन बढ़ा, सोशल मीडिया मित्र बढ़े, सच्चे मित्र घटे

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मित्रता दिवस का महत्व और इसे मनाने की परंपरा

मित्रता दिवस यानी Friendship Day सिर्फ़ एक दिन नहीं, बल्कि वो अवसर है जब हम अपने दोस्तों के प्रति प्रेम, आभार और सम्मान प्रकट करते हैं। दोस्ती मानव जीवन का सबसे ख़ूबसूरत रिश्ता है, जिसमें कोई स्वार्थ नहीं होता, केवल अपनापन होता है। भारत में तो इसे भगवान श्री कृष्णा और सुदामा से जोड़कर मनाया जाता है। क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा से अपनी दोस्ती निभाई थी।

मित्रता दिवस का इतिहास

मित्रता दिवस की शुरुआत 1930 के दशक में अमेरिका से हुई। 1958 में पहली बार पैराग्वे में इसे अंतरराष्ट्रीय रूप से मनाया गया। 1998 में संयुक्त राष्ट्र ने ‘विन्नी द पूह’ को दुनिया का मित्रता राजदूत घोषित किया। भारत समेत कई देशों में यह दिन विशेष उत्साह से मनाया जाता है।

भारत में मित्रता दिवस का बहुत महत्व है

वैसे तो भारत में दोस्ती का कोई दिन फिक्स नहीं है । लेकिन अब समय के साथ बदलाव आया है और  अब इसे हर साल अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। इस साल यह दिन 3 अगस्त को पड़ रहा है। यह दिन दोस्तों के बीच प्यार, समर्थन और साझा की गई यादों का जश्न मनाने का अवसर है।

*मित्रता दिवस का महत्व*

मित्रता दिवस दोस्ती के अनमोल बंधन को पहचानने और उसका जश्न मनाने का दिन है। यह दिन हमें सच्ची दोस्ती के महत्व को समझने और उसे मजबूत बनाने का अवसर देता है। दोस्ती जीवन के सबसे अनमोल रिश्तों में से एक है, जो हमें सुकून, खुशी और खुद को व्यक्त करने का मौका देती है।

*मित्रता दिवस कैसे मनाया जाता है?*

भारत में मित्रता दिवस को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है।

सोशल मीडिया फ्रेंडशिप मिलियंस में पहुंच गई असल मित्र देखने को नहीं मिलते

वर्तमान में सोशल मीडिया फ्रेंडशिप लोगों की मिलियंस में पहुंच गई है।  लेकिन जब वह अपने आप को खोजते हैं तो खुद को अकेला महसूस करते हैं क्योंकि उनका कोई मित्र होता ही नहीं है ।इसका दोष भी किसी दूसरे को नहीं दे सकते इसके लिए जिम्मेदार भी हम ही है। इसीलिए तो कहते हैं बुजुर्ग की दोस्त और दोस्ती एक खजाने की तरह है, जिसे संजोकर रखना जरूरी है और इसके लिए संवाद जरूरी है ,आज लोगों के पास संवाद करने का समय नहीं है और इसी के चलते दोस्ती का रिश्ता भी अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सिमट कर रह गया है। सिर्फ खानापूर्ति रह गया है।
– *फ्रेंडशिप बैंड का आदान-प्रदान*: दोस्तों के बीच फ्रेंडशिप बैंड बांधना एक लोकप्रिय परंपरा है, जो बंधन और स्नेह का प्रतीक है।
– *ग्रीटिंग कार्ड और उपहार*: दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड और उपहार देना एक अच्छा विचार है, जो आपकी दोस्ती को मजबूत बनाने में मदद करता है।
– *साझा यादें और अनुभव*: दोस्तों के साथ साझा यादें और अनुभवों को याद करना और उन्हें फिर से जीना एक अच्छा तरीका है मित्रता दिवस मनाने का।
– *सामाजिक समारोह*: दोस्तों के साथ सामाजिक समारोह आयोजित करना, जैसे कि पिकनिक या पार्टी, एक अच्छा तरीका है मित्रता दिवस मनाने का।पार्टी या छोटी‑सी गेट-टुगेदर रखकर

उन दोस्तों से भी संपर्क कर, जिनसे लंबे समय से बात नहीं हुई। आजकल कॉलेज और स्कूल फ्रेंड्स की भी बड़ी पार्टियों पुराने दोस्तों को याद करने के लिए उनसे मिल मुलाकात के लिए की जाती है । यह चलन अब लगातार बढ़ता जा रहा है इसका सबसे बड़ा कारण है कि लोगों के पास समय नहीं है फिर सब लोग एक  पार्टी करते हैं और सब आपस में मिलते हैं।

मित्रता दिवस क्यों मनाते हैं?

विदेश में समयाभाव के चलते इस दिन को मनाया जाने लगा था लेकिन अब भारत में भी लोग  व्यस्त रहने लगे हैं । जो कुछ भी नहीं करता उससे भी पूछोगे तो रहेगा समय नहीं है । लोगों के पास समय नहीं है ,इस खास दिन पर अपने दोस्तों को याद कर लेते  है। आजकल सोशल मीडिया का जमाना है तो लोग सोशल मीडिया पर ही एक दूसरे को बधाई देकर याद करते हैं ,मिलना जुलना कम हो गया है।

दोस्तों को धन्यवाद कहने के लिए

पुराने दोस्तों को याद करने और नए दोस्तों से रिश्ता मजबूत करने के लिए

जीवन में दोस्ती के महत्व को समझने और उसे सेलिब्रेट करने के लिए आज के दिन को खास तौर पर मनाया जाता है।

समाज में प्यार, भाईचारे और आपसी समझ को बढ़ावा देने के लिए

फ्रेंडशिप डे ,दोस्त मित्रता दिवस समाज में प्यार भाईचारे और आपसी समझ को बढ़ावा देने का सबसे कारगर तरीका है । दोस्ती और मित्रता में ना कोई जाति ,न पाती और ना कोई धर्म का भेद होता है ,बस दोस्त, दोस्त होते हैं इसीलिए यह भाईचारे और समाज में प्यार बढ़ाने का सबसे सक्षम और कारगर तरीका है।

दोस्ती का असली संदेश

मित्रता दिवस सिर्फ़ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि ये याद दिलाता है कि सच्चा दोस्त वही है जो सुख‑दुख में साथ निभाए। दोस्ती उम्र, जाति, धर्म या भाषा की सीमाओं से परे होती है। यह भरोसे, सम्मान और समझ पर टिकी होती है।

दोस्ती निभाइए, दोस्त बनाइए — क्योंकि ज़िंदगी में सच्चे दोस्त सबसे बड़ा खज़ाना हैं! जिसके पास स्कूल से लेकर बुजुर्ग होने तक दोस्तों की कतार है वही सबसे धनवान है।

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