लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गौतम शर्मा
राजसमन्द।
राजसमन्द जिले के मेघाखेड़ा गांव में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मधुमक्खी पालन का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का संचालन कृषि एवं कीट विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. सीताराम सिरवी ने किया। कार्यक्रम में 20 से अधिक महिलाओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और नए कौशल सीखने की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
डॉ. सिरवी ने प्रशिक्षणार्थी महिलाओं को मधुमक्खियों की प्रमुख प्रजातियों, कॉलोनी की संरचना, रानी, नर एवं कार्यकर्ता मधुमक्खियों की भूमिकाओं के बारे में वैज्ञानिक और सरल तरीके से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने छत्तों के प्रबंधन, शहद उत्पादन की उन्नत तकनीकों, मौसमी देखभाल तथा रोग और कीट नियंत्रण के प्रभावी उपायों पर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन एक कम लागत में शुरू होने वाला लाभदायक व्यवसाय है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए आय और रोजगार का मजबूत साधन बन सकता है। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
प्रशिक्षण में शामिल महिला किसानों—आशा कुमारी सिरवी, सुनीता सिरवी, पूजा सिरवी, ललिता भायल, सीता राठौड़, देवली बाई सिरवी, रुक्मणी बाई राठौड़, कमला बाई भील, उमा बाई भील, गुड़ी बाई अहीर, लक्ष्मी सिरवी, दिव्या सिरवी सहित कुल 20 प्रतिभागियों—ने मधुमक्खी पालन की तकनीकें सीखने में विशेष रुचि दिखाई और इसे भविष्य में रोजगार के रूप में अपनाने की इच्छा व्यक्त की।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन से संबंधित पुस्तिकाएँ वितरित की गईं। आयोजकों ने जल्द ही उन्नत स्तर का प्रशिक्षण आयोजित करने की घोषणा भी की।
ग्रामीण महिलाओं को नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में मेघाखेड़ा गाँव की यह पहल आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।