लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जो व्यक्ति एकाग्रता से शास्त्रों का श्रवण करेगा, वह जीवन के दुःखों से मुक्त होकर आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता हे = मेवाड़ उपप्रवर्तक कोमल मुनि
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक श्राविका रहे मौजूद।
राजसमन्द। जिले के कुवारिया श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ कुवारिया के तत्वाधान मे चल रहे कोमल मुनि महाराज आदि ठाना 3 के सानिध्य में प्रतिदिन धर्म की गंगा बह रही हे शनिवार को उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि ने कहा की जो व्यक्ति एकाग्रता से शास्त्रों का श्रवण करेगा, वह जीवन के दुःखों से मुक्त होकर आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता हे चातुर्मास का पावन समय साधना व आत्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ है चातुर्मास मे शास्त्रों का श्रवण कर अपने जीवन मे उतारना ही व्यक्ति को सच्चे सुखो की और ले जाता है।
जो व्यक्ति एकाग्र होकर शास्त्र सुनता है, वह अपने अनंत जन्म-मरण का क्षय करता हे व्यक्ति जिस सुख को सांसारिक वस्तुओं में खोजता है, वह केवल सुख का आभास होता है। आत्मिक सुख की प्राप्ति शास्त्रों के श्रवण और आचरण से ही संभव है। चातुर्मास का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि व्यक्ति अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर आत्मनिरीक्षण करे और धर्म की ओर अग्रसर हो सच्चा सुख चाहिए तो शास्त्र श्रवण करना चाहिए मिथ्या सुख चाहिए तो व्यक्ति बाहर भ्रमण करता रहेगा जीवन में जिसे सुख माना जाता है, वह केवल सुख का आभास है।
आत्मिक सुख केवल शास्त्र श्रवण से ही मिल सकता है। संसार में सुख केवल सुखाभास पर टिका है दूसरों के प्रति सद्भाव और सेवा भाव रखना चाहिए। ईर्ष्या और द्वेष का भाव जीवन में दुःख और पतन का कारण बनते हैं। एक छोटी सी भूल, एक नकारात्मक विचार या किसी के प्रति दुर्भावना, व्यक्ति के समूचे जीवन को प्रभावित कर सकती है इसलिए हर व्यक्ति को प्राणी मात्र के हित में सोचना चाहिए। दूसरों के दुख दूर करने की भावना रखनी चाहिए।










































