*भक्त शिरोमणी करमा बाई का जन्म कालवा गांव में जीवण राम डूडी के घर हुआ था*
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*जितेन्द्र सिंहशेखावत*
वरिष्ठ पत्रकार रा.प.
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*जगन्नाथपुरी (उड़ीसा)में विराजे भगवान जगन्नाथ को छप्पन भोग जीमने के पहले राजस्थान की करमा बाई की खीचड़ी (खिंचड़ा) आज भी अति स्वादिष्ट लगती है ।*
*रैवासा में अग्रदासजी के शिष्य *नाभादास ने भक्त माल ग्रंथ में मकराना के पास कालवा गांव में जन्मी भक्त शिरोमणी करमाबाई की भक्ति का वर्णन किया है।*
*जीवण राम डूडी के घर पर 20 अगस्त सन् 1615 को जन्मी करमा की बनाई खीचड़ी का जीमण करने भगवान जगन्नाथ स्वयं पधारते थे। जाट परिवार की करमा के पिता जीवणराम और मां रतनी देवी तीर्थ यात्रा पर निकले तब वे बेटी को खिचड़ी का भोग लगाने की जिम्मेदारी सौंप गए थे। करमा बाई ने भगवान के समक्ष खीचड़ी रखी लेकिन वे नहीं आए तब वह खुद भूखी रहने का हठ कर बैठ गई । करमा बाई के भोलेपन से प्रसन्न हो भगवान खुद प्रकट हो गए ।*
*संस्कृत विद्वान डा. सुभाष शर्मा के मुताबिक भक्तमाल में लिखा है कि अंतिम दिनों में करमा बाई जगन्नाथ पुरी चली गई थी। वहां नित्य भगवान को खीचड़ी का भोग लगाती । पुरी के जगन्नाथ मंदिर में आज भी रोजाना प्रातःकाल खीचड़ी का ही भोग लगाया जाता है। जगन्नाथपुरी में एक वैष्णव संत ने करमा बाई को बाल कृष्ण की मूर्ती भेंट कर बच्चे तरह सेवा करने की सलाह दी थी।* *जगन्नाथ धाम में*
*करमा बाई के पुरी स्थित समाधि मंदिर के सामने जगन्नाथ रथ यात्रा आज भी रुकती है ।*
*मिट्टी के सात बर्तनों को चूल्हे पर चढ़ाकर पकाई खीचड़ी का प्रसाद भक्तों को आज भी बांटा जाता है ।*
……. *भक्तमाल में लिखा है।*
*छप्पन भोग तै पहिले खीच करमा बाई को भावैहि ।*